एग्रीवेट: Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की भक्ति और उपवास के लिए खास माने जाते हैं. इस दौरान बहुत से लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी श्रद्धा और क्षमता के हिसाब से व्रत करते हैं. व्रत रखने जा रहे हैं तो सिर्फ पूजा-पाठ की तैयारी ही नहीं, खाने-पीने का भी ध्यान रखना जरूरी है. नवरात्रि में आमतौर पर हल्का और सात्विक खाना खाने की परंपरा है. ऐसे में फल, दूध, दही, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे जैसी चीजें व्रत की थाली का हिस्सा बन सकती हैं.
व्रत के दौरान ताजे फल सबसे आसान विकल्प माने जाते हैं. केला, सेब, पपीता, संतरा और अनार जैसे फल शरीर को ऊर्जा देने के साथ पानी की कमी पूरी करने में भी मदद करते हैं. दिनभर कमजोरी महसूस न हो, इसके लिए मौसम के हिसाब से फल लिए जा सकते हैं. दूध, दही, पनीर और घी का इस्तेमाल भी व्रत के खाने में किया जाता है. दूध या दही से बनी चीजें पेट को कुछ समय तक भरा रखने में मदद कर सकती हैं. हालांकि, अगर किसी को डेयरी चीजों से परेशानी होती है तो इन्हें खाने से बचना चाहिए.
व्रत में रोज एक जैसा खाना खाने की जरूरत नहीं है. कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और सामक के चावल से कई तरह के फलाहारी व्यंजन बनाए जा सकते हैं. इनसे रोटी, चीला, खिचड़ी और दूसरे व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं. साबूदाना भी व्रत में खूब खाया जाता है. इससे साबूदाने की खिचड़ी, खीर या वड़ा बनाया जाता है. हालांकि, वड़ा जैसे तले हुए व्यंजन कम मात्रा में लेना बेहतर रहता है.
व्रत की थाली में आलू और शकरकंद भी शामिल किए जाते हैं. इन्हें उबालकर या कम तेल में बनाकर खाया जा सकता है. इसके अलावा बादाम, अखरोट, काजू और किशमिश जैसे मेवे थोड़ी मात्रा में लिए जा सकते हैं. ये व्रत के दौरान ऊर्जा देने वाले विकल्प हो सकते हैं. नमक की बात करें तो नवरात्रि के व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है.
नवरात्रि के व्रत में आमतौर पर गेहूं, सामान्य चावल, दाल और दूसरे अनाज नहीं खाए जाते. प्याज और लहसुन से भी दूरी रखी जाती है. मांसाहारी भोजन, शराब और दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन भी व्रत के दौरान नहीं किया जाता. इसके अलावा बहुत ज्यादा तला-भुना, पैकेट वाला और ज्यादा प्रोसेस्ड खाना खाने से बचना चाहिए. व्रत के नाम पर दिनभर सिर्फ तली हुई चीजें खाने से शरीर को परेशानी हो सकती है.
नवरात्रि का व्रत सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं माना जाता. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों मन और व्यवहार में भी संयम रखने की कोशिश की जाती है. भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं, ध्यान लगाते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती या दूसरे धार्मिक पाठ करते हैं. व्रत के दौरान क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कोशिश की जाती है. कई लोग इन दिनों ब्रह्मचर्य का पालन भी करते हैं. यानी नवरात्रि का व्रत शरीर के साथ मन को भी अनुशासन में रखने का एक तरीका माना जाता है.