एग्रीवेट: महाराष्ट्र के नासिक जिले में सूखे से प्रभावित इलाकों में फसलों को हुए नुकसान का आकलन तेजी से किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार तक करीब 40 फीसदी सर्वे पूरा हो चुका है. अगले चार से पांच दिनों में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी. कृषि और राजस्व विभाग की टीमें पिछले एक सप्ताह से सूखे की चपेट में आए तालुकों में खेतों का सर्वे कर रही हैं. इसका उद्देश्य लंबे समय तक बारिश नहीं होने और मॉनसून में उतार-चढ़ाव के कारण खरीफ फसलों को हुए नुकसान का पता लगाना है. खास बात यह है कि सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि प्रभावित किसानों को कितनी राहत और मुआवजा दिया जाना चाहिए.
नासिक कृषि विभाग के उप निदेशक महेश वेठेकर ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि नुकसान का आकलन करने के लिए पंचनामा की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि बाकी काम अगले चार से पांच दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है. सर्वे पूरा होने के बाद अंतिम रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी. नासिक जिले के कुल 15 तालुकों में से 10 को राज्य की ‘ट्रिगर-1’ सूखा सूची में शामिल किया गया है. इनमें मालेगांव, बागलाण, कलवण, नांदगांव, सुरगाणा, इगतपुरी, पेठ, सिन्नर, येवला और देवला शामिल हैं.
महाराष्ट्र के नासिक जिले में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आने का अनुमान है. कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस बार खरीफ फसलों की कुल पैदावार में 40 से 45 फीसदी से ज्यादा की कमी आ सकती है. हालांकि, फसल नुकसान का सही आंकड़ा सर्वे पूरा होने के बाद ही सामने आएगा. जून से सितंबर के मॉनसून सीजन के दौरान नासिक जिले में औसत बारिश का सिर्फ 71 फीसदी पानी बरसा. वहीं, सूखे की चपेट में आए 10 तालुकों में सामान्य बारिश के मुकाबले केवल 43 से 63 फीसदी बारिश दर्ज की गई. कम बारिश के कारण खेतों में नमी की कमी हो गई, जिससे फसलों की बढ़वार पर असर पड़ा. इसके बावजूद किसानों ने इस खरीफ सीजन में 6.51 लाख हेक्टेयर में बुवाई की. यह जिले के औसत बुवाई क्षेत्र 6.4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है. यानी किसानों ने सामान्य क्षेत्र के मुकाबले करीब 101.7 फीसदी रकबे में खेती की.
अधिकारियों के शुरुआती आकलन के मुताबिक, मक्का, सोयाबीन और धान की पैदावार पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है. इन तीनों फसलों की जिले के कुल खरीफ रकबे में करीब 80 फीसदी हिस्सेदारी है. फसल नुकसान का अंतिम आकलन पंचनामा प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा. इसके आधार पर प्रभावित किसानों को राहत और मुआवजा देने का फैसला होगा.