एग्रीवेट: 04 अक्टूबर 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश: सोयाबीन भावांतर योजना का पंजीयन आज से शुरू, 17 अक्टूबर तक मौका – मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना के तहत पंजीयन की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। किसान 17 अक्टूबर तक अपना नाम इस योजना में दर्ज करा सकते हैं। यह योजना तब काम आती है जब कटाई के बाद बाजार में सोयाबीन का भाव सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य से नीचे चला जाता है।
राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल के जरिए यह पंजीयन कराया जा रहा है। पिछले साल भी इसी तरह की योजना के तहत किसानों को भावांतर की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई थी।
किसान अपना पंजीयन ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय और सहकारी समितियों में जाकर मुफ्त करा सकते हैं। इसके अलावा एमपी ऑनलाइन कियोस्क और साइबर कैफे जैसे निजी केंद्रों पर भी पंजीयन की सुविधा है, जहां अधिकतम 50 रुपये शुल्क लिया जा सकता है।
पंजीयन के लिए किसानों को आधार कार्ड, भूमि के दस्तावेज, फोटो पहचान पत्र, बैंक खाता विवरण और आईएफएससी कोड के साथ मोबाइल नंबर देना होगा। फसल बिक्री से पहले आधार सत्यापन अनिवार्य किया गया है।
योजना का लाभ सामान्य किसानों के अलावा सिकमी, बटाईदार और वनपट्टाधारी किसानों को भी मिलेगा, लेकिन इनका पंजीयन केवल सहकारी केंद्रों के माध्यम से ही होगा।
केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5,708 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल से करीब 7.13 प्रतिशत ज्यादा है। भावांतर योजना में किसान को मिलने वाली सटीक राशि कटाई के बाद तय होगी।
दरअसल मंडियों में सोयाबीन की आवक शुरू होने पर एक निश्चित अवधि में औसत मॉडल भाव तय किया जाता है। इसके बाद समर्थन मूल्य और मॉडल भाव के अंतर की राशि पंजीकृत किसानों के खातों में सीधे भेजी जाती है। इसलिए किसानों को भावांतर की राशि जानने के लिए मंडी में आवक शुरू होने और भाव तय होने का इंतजार करना होगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों ने समय पर पंजीयन नहीं कराया, वे योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं, इसलिए 17 अक्टूबर की अंतिम तारीख से पहले पंजीयन पूरा कराना जरूरी है।
मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्यों में शामिल है और यहां के लाखों किसानों की आमदनी काफी हद तक इस फसल पर टिकी है। हर साल कटाई के बाद जब मंडियों में एक साथ बड़ी मात्रा में सोयाबीन की आवक होती है, तो अक्सर भाव समर्थन मूल्य से नीचे चला जाता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
भावांतर भुगतान योजना इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए बनाई गई है। इसके तहत सरकार किसान को बाजार में भले ही कम दाम मिले, लेकिन समर्थन मूल्य और मंडी के औसत भाव के बीच का अंतर सीधे उसके खाते में भेज देती है। इससे किसान को उसकी फसल का तय किया गया वाजिब दाम मिल जाता है, और उसे फसल को रोककर रखने या औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी नहीं रहती।
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पंजीयन के बाद किसान अपनी उपज तय केंद्रों पर ही बेच सकेंगे और भुगतान सीधे बैंक खाते में ही आएगा। जो किसान पंजीयन में कोई गलती होने पर समय पर उसे सुधार नहीं कराएंगे, उन्हें भुगतान में देरी का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए विभाग ने किसानों से सभी दस्तावेज सही तरीके से जमा करने की अपील की है।