एग्रीवेट: 04 अक्टूबर 2026, गांधीनगर: गुजरात: कपास किसान ऐप पर MSP पंजीयन जारी, 31 अक्टूबर तक मौका – गुजरात में कपास किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपज बिक्री का पंजीयन कपास किसान मोबाइल ऐप के जरिए चल रहा है। किसान 31 अक्टूबर तक इस ऐप पर अपना पंजीयन करा सकते हैं, जिसके बाद ही वे कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के खरीद केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर कपास बेच सकेंगे।
कपास किसान ऐप पर पंजीकृत किसानों को नजदीकी खरीद केंद्र, खरीद की तारीख और समर्थन मूल्य नीति से जुड़ी सारी जानकारी मिलती है। इस डिजिटल व्यवस्था का मकसद खरीद केंद्रों पर किसानों की भीड़ और लंबा इंतजार कम करना है।
जिन किसानों को ऐप के इस्तेमाल में दिक्कत आ रही है, उनके लिए एक व्हाट्सऐप हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, जहां से वे मदद ले सकते हैं।
खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने मध्यम रेशे वाले कपास का समर्थन मूल्य 8,267 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाले कपास का समर्थन मूल्य 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। सीसीआई इसी भाव पर किसानों से कपास की खरीद करती है।
समर्थन मूल्य के अलावा गुजरात के कपास किसानों को केंद्र सरकार के कपास उत्पादकता मिशन के तहत भी सहायता दी जा रही है। इस मिशन के तहत गुजरात को चालू वर्ष के लिए 134.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसका लक्ष्य राज्य के 21 कपास उत्पादक जिलों में एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र को कवर करना है।
इस मिशन के तहत जो किसान सघन रोपण तकनीक (क्लोजर स्पेसिंग) अपनाते हैं, उन्हें प्रति हेक्टेयर 14,000 रुपये की सहायता मिलती है। इसी तरह समेकित फसल प्रबंधन (आईसीएम) अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 7,500 रुपये की मदद दी जाती है। हालांकि एक किसान हर साल अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए ही इस सहायता का लाभ ले सकता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो किसान अभी तक कपास किसान ऐप पर पंजीयन नहीं करा पाए हैं, उन्हें 31 अक्टूबर की अंतिम तारीख से पहले यह काम पूरा कर लेना चाहिए, ताकि खरीद के समय किसी तरह की परेशानी न हो।
गुजरात देश के सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्यों में से एक है और यहां के लाखों किसान परिवारों की आजीविका इस फसल पर निर्भर है। राज्य में हर साल बड़े पैमाने पर कपास की बुआई होती है और खरीद के मौसम में सीसीआई के केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ जुटती है।
कपास उत्पादकता मिशन के तहत देश भर में कपास की पैदावार 440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने और 2030-31 तक कुल उत्पादन 498 लाख गांठ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत देश भर में करीब दो हजार जिनिंग और प्रोसेसिंग फैक्टरियों के आधुनिकीकरण पर भी काम हो रहा है, ताकि कपास में मिलावट और अशुद्धियां कम की जा सकें।
मिशन के तहत “कस्तूरी कॉटन भारत” नाम से एक ब्रांडिंग और ट्रेसेबिलिटी पहल भी चलाई जा रही है, जिसका मकसद भारतीय कपास को दुनिया के बाजार में एक प्रीमियम उत्पाद के तौर पर पहचान दिलाना है। इसके साथ ही मंडियों का डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का पारदर्शी तरीके से भाव मिल सके।
गुजरात के कृषि विभाग का कहना है कि डिजिटल पंजीयन व्यवस्था और समय पर मिलने वाली जानकारी से किसानों को खरीद केंद्रों पर बार-बार जाने और घंटों इंतजार करने से राहत मिलेगी, जिससे उनका समय और मेहनत दोनों बचेंगे। विभाग ने किसानों से यह भी अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और पंजीयन के दौरान अपने बैंक खाते व आधार से जुड़ी जानकारी ध्यान से भरें, ताकि भुगतान के समय किसी तरह की रुकावट न आए।