गुजरात में 63 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 27 सितंबर 2026, गांधीनगर: गुजरात में 63 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण – गुजरात में डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। राज्य में अब तक 63.35 लाख से ज्यादा किसानों ने फार्मर रजिस्ट्री में अपना पंजीकरण करा लिया है। यह पंजीकरण केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक और डिजिटल कृषि मिशन का हिस्सा है, जिसका मकसद हर किसान को एक यूनिक डिजिटल पहचान देना है।

फार्मर रजिस्ट्री के तहत किसान के आधार-आधारित पहचान को उसके सत्यापित भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाता है। इससे हर पात्र किसान को एक यूनिक फार्मर आईडी मिलती है, जो आगे चलकर विभिन्न सरकारी योजनाओं में उसकी पहचान और पात्रता जांचने का आधार बनेगी।

राज्य के राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. जयंती एस. रवि के अनुसार, फार्मर रजिस्ट्री के जरिए किसान विभिन्न योजनाओं का लाभ सरल, तेज और पारदर्शी तरीके से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था किसानों को बार-बार दस्तावेज जमा कराने की परेशानी से भी मुक्त करेगी।

फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ी डिजिटल पहचान का सीधा फायदा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली सरकारी खरीद, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), कृषि ऋण योजनाओं और अलग-अलग कृषि सब्सिडी योजनाओं में मिलेगा। सत्यापन प्रक्रिया तेज होने से आवेदन में लगने वाला समय भी घटेगा।

गुजरात अकेला राज्य नहीं है जहां यह अभियान चल रहा है — यह भारत सरकार के व्यापक डिजिटल कृषि मिशन का हिस्सा है, जिसके तहत हर राज्य में किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। हालांकि गुजरात में पंजीकरण की रफ्तार और आंकड़ा राज्य सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है। अभी तक इस पंजीकरण के लिए कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई है, यानी जो किसान अब तक पंजीकरण नहीं करा पाए हैं, वे आगे भी अपने नजदीकी ई-ग्राम केंद्र या तहसील कार्यालय से जुड़कर पंजीकरण करा सकते हैं।

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे फार्मर रजिस्ट्री से जुड़े किसानों की संख्या बढ़ेगी, आने वाले समय में योजनाओं के आवेदन के लिए अलग से लंबी कागजी प्रक्रिया की जरूरत खत्म हो जाएगी।

राजस्व विभाग का कहना है कि यह पंजीकरण प्रक्रिया लगातार जारी है और जो किसान अब तक इससे नहीं जुड़ पाए हैं, वे आने वाले दिनों में भी अपना पंजीकरण करा सकते हैं। विभाग के मुताबिक, आधार आधारित पहचान और भूमि रिकॉर्ड को जोड़ने से न सिर्फ फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी बल्कि असली लाभार्थी किसानों तक योजनाओं का पैसा और सहायता सीधे और तेजी से पहुंच सकेगी।

अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में फार्मर रजिस्ट्री का आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि यह भारत सरकार के व्यापक डिजिटल कृषि मिशन का हिस्सा है और इसे देश के सभी राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि एक बार डिजिटल पहचान पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद केंद्र और राज्य दोनों स्तर की योजनाओं के बीच तालमेल बेहतर होगा। इससे यह पता लगाना भी आसान होगा कि किस इलाके में किस फसल की बुआई हो रही है, ताकि सरकार बीज, खाद और सिंचाई जैसी जरूरी सुविधाओं की योजना पहले से बेहतर तरीके से बना सके।

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