एग्रीवेट: पंजाब में धान की खरीद को सीमित रखने के लिए राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) ने छह जिलों में करीब 400 मंडियां बंद कर दी हैं. ये मंडियां तरनतारन, अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर और कपूरथला में हैं. इसके अलावा जालंधर जिले में भी कुछ मंडियां बंद की गई हैं. राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है. दरअसल, केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने पंजाब में धान की कुल आवक 180 लाख टन तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया है. इसी के तहत राज्य सरकार मंडियों में धान की आवक नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है.
हालांकि, विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि इस सीजन में धान की कुल आवक 190 लाख टन तक पहुंच सकती है. इसकी वजह कृषि विभाग का अनुमान है, जिसके मुताबिक इस साल धान की पैदावार पिछले अनुमान से 7 से 10 फीसदी ज्यादा हो सकती है. ऐसे पंजाब की मंडियों में 1 अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होने के बाद अब तक करीब 130 लाख टन धान पहुंच चुका है. इसमें से 98.5 लाख टन धान का उठाव किया जा चुका है. राज्य में धान की खरीद 2,461 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर हो रही है. हालांकि, सरकारी खरीद नवंबर के मध्य तक जारी रहने की उम्मीद है. इसके लिए पूरे पंजाब में 1,872 मंडियां और 761 अस्थायी खरीद केंद्र बनाए गए हैं. इन्हीं केंद्रों के जरिए किसानों से धान खरीदा जा रहा है.
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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को कहा कि पंजाब में पहली बार मंडियों में धान की कुल आवक पर सीमा तय की गई है. केंद्र सरकार ने 180 लाख टन धान की खरीद के लिए ही कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) मंजूर की है. अगर धान की आवक इस सीमा से ज्यादा होती है, तो राज्य सरकार को अतिरिक्त खरीद के लिए केंद्र से नई मंजूरी और फंड लेना होगा. अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी है.
पंजाब में इस साल धान की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है. इसे देखते हुए राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है. विभाग को धान खरीद के लिए 42,787 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) मिली है. लेकिन राज्य में धान की आवक तय लक्ष्य से ज्यादा होने की आशंका है. ऐसे में सरकार खरीद के लिए अतिरिक्त मंजूरी और फंड की जरूरत पड़ने की संभावना जता रही है.
राज्य में इस सीजन गैर-बासमती धान का कुल उत्पादन 220 लाख टन से ज्यादा रहने का अनुमान है. सरकारी एजेंसियां इसी धान की खरीद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए करती हैं. कृषि विभाग की ओर से कराए गए फसल कटाई प्रयोगों में इस साल पैदावार 7 से 10 फीसदी ज्यादा रहने का अनुमान लगाया गया है.
पंजाब में पिछले वर्षों के रुझान के मुताबिक, कुल धान उत्पादन का करीब 90 फीसदी हिस्सा सरकारी खरीद के लिए मंडियों में पहुंचता है. इस हिसाब से इस साल मंडियों में धान की आवक केंद्र की ओर से तय 180 लाख टन के लक्ष्य से ज्यादा हो सकती है. राज्य सरकार की चिंता की एक वजह हरियाणा में पिछले साल धान खरीद का मामला भी है. 2025 में हरियाणा के लिए 36 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन वहां 62 लाख टन धान की खरीद हुई. यानी तय लक्ष्य से 26 लाख टन ज्यादा खरीद की गई. केंद्र सरकार ने अतिरिक्त धान को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. अब पंजाब सरकार को आशंका है कि ज्यादा उत्पादन के कारण उसके सामने भी ऐसी ही स्थिति पैदा हो सकती है.