हिमाचल के बागवानों पर मौसम की मार..सेब उत्पादन में भारी गिरावट,1.70 करोड़ पेटी रहने का अनुमान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: इस साल हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन में भारी गिरावट आई है. पिछले साल राज्य में 3.49 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था, लेकिन इस बार उत्पादन इसके आधे तक भी पहुंचने की उम्मीद नहीं है. सेब की कटाई का सीजन लगभग खत्म हो चुका है. अब तक बाजार में सिर्फ 1.37 करोड़ पेटी सेब ही पहुंच पाई हैं. बागवानी विभाग के निदेशक सतीश शर्मा के मुताबिक, मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत खरीदे गए सेब और कोल्ड स्टोरेज में रखे फलों को मिलाकर इस साल कुल उत्पादन 1.60 करोड़ से 1.70 करोड़ पेटी के बीच रहने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल में यह दूसरी बार होगा, जब हिमाचल प्रदेश में सेब का उत्पादन इतना कम रहेगा.

हिमाचल प्रदेश में सेब का सबसे ज्यादा उत्पादन 2010-11 में हुआ था. उस साल राज्य में 4.46 करोड़ से ज्यादा पेटी सेब का उत्पादन हुआ था. इसके बाद से अब तक किसी भी साल उत्पादन 4 करोड़ पेटी के पार नहीं पहुंचा है. राज्य में अब तक सिर्फ तीन बार सेब का उत्पादन 2 करोड़ पेटी से नीचे रहा है. इनमें इस साल भी शामिल है. सबसे कम उत्पादन 2011-12 में दर्ज किया गया था, जब सिर्फ 1.37 करोड़ पेटी सेब पैदा हुआ था. वहीं, 2018-19 में उत्पादन 1.84 करोड़ पेटी रहा था.

बागवानी विभाग के निदेशक सतीश शर्मा ने सेब उत्पादन में गिरावट की वजह इस साल मौसम में आए बदलावों को बताया है. उन्होंने कहा कि सेब में फूल आने के समय ज्यादातर इलाकों में तापमान अचानक गिर गया था. इसके अलावा, ठंड कम पड़ने और बार-बार ओलावृष्टि होने से भी फसल को नुकसान पहुंचा. इन वजहों से उत्पादन पर बुरा असर पड़ा.

पिछले 15 साल में हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती का रकबा करीब 15 फीसदी बढ़ा है. इसके बावजूद उत्पादन 2010-11 के रिकॉर्ड स्तर के आसपास भी नहीं पहुंच पाया है. पिछले एक दशक में बागवानों ने पैदावार और फलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए हाई-डेंसिटी यानी सघन बागवानी का तरीका अपनाना शुरू किया है. हालांकि, इसका असर अभी उत्पादन के आंकड़ों में साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहा है.

हिमाचल प्रदेश में सेब की औसत पैदावार 5 से 6 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है. वहीं, न्यूजीलैंड जैसे विकसित सेब उत्पादक देशों में एक हेक्टेयर से 55 मीट्रिक टन से ज्यादा उत्पादन होता है. वहां के आधुनिक बागानों में पैदावार 80 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच जाती है. बागवानी विभाग के निदेशक सतीश शर्मा ने मौसम के अलावा सेब उत्पादन कम रहने की दो बड़ी वजहें बताई हैं. उन्होंने कहा कि राज्य के ज्यादातर पुराने बागानों में पेड़ अब पहले जितने फल नहीं दे रहे हैं. इससे उनकी पैदावार घट गई है. वहीं, बागवान धीरे-धीरे हाई-डेंसिटी यानी सघन बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं. यह बदलाव एक साथ नहीं हो सकता. शर्मा के मुताबिक, अगले चार से पांच साल में इसका असर उत्पादन पर दिखाई देने की उम्मीद है.

उन्होंने बताया कि सेब की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विभाग अच्छी किस्म के पौधों को बढ़ावा दे रहा है. इसके तहत बागवानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे बांटे जा रहे हैं. शर्मा के मुताबिक, इस सीजन में बागवानों को 8 से 10 लाख उन्नत किस्म के पौधे दिए जाएंगे. इन पौधों से आने वाले वर्षों में सेब की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होने की उम्मीद है.

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