एग्रीवेट: कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. किसानों ने दो दिन तक राष्ट्रीय राजमार्ग जाम रखा है. इसके साथ ही 14 अक्टूबर को बेलगावी जिले के हट्टारगी से शुरू हुई ‘हुबली चलो’ पदयात्रा भी जारी है. किसानों के इस आंदोलन ने गन्ना उत्पादकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को एक बार फिर सामने ला दिया है. किसानों का कहना है कि उन्हें केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से भी स्पष्ट आश्वासन चाहिए. उन्होंने जोशी को 18 अक्टूबर को कित्तूर आने का न्योता दिया है. किसान चाहते हैं कि केंद्रीय मंत्री रानी चन्नम्मा को श्रद्धांजलि देने के बाद उनकी मांगों का समाधान करने का भरोसा दें. किसानों ने कहा कि अगर प्रल्हाद जोशी कित्तूर आकर उनकी समस्याएं दूर करने का आश्वासन देते हैं, तो वे उनका भव्य स्वागत करेंगे.
दरअसल, मार्च 2026 में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हुबली में प्रल्हाद जोशी से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने गन्ने का उचित भाव देने की मांग उठाई थी. किसानों का कहना था कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) पिछले नौ साल से 31 रुपये प्रति किलो पर बना हुआ है. उन्होंने गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति टन करने की मांग की. साथ ही, किसानों ने राज्य परामर्श मूल्य (SAP) तय करने की मांग भी रखी, ताकि चीनी मिलों की ओर से दिए जाने वाले भाव और सरकार के तय मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई हो सके.
गन्ना पेराई का सीजन शुरू होने से पहले किसानों की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ. इसके बाद 29 सितंबर को हजारों गन्ना किसान केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के गृह क्षेत्र हुबली पहुंचे. किसान अपनी मांगों पर ठोस आश्वासन चाहते थे. हालांकि, उन्हें 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में गन्ना उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक के लिए बुलाया गया. केंद्र सरकार ने इस बैठक के नतीजों को सकारात्मक बताया, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए. उनका कहना है कि बैठक में उनकी मांगों को ठीक से नहीं सुना गया. इसके बाद किसानों ने बेलगावी और उत्तर कर्नाटक के दूसरे इलाकों में पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया.
अब किसान कर्नाटक राज्य रैयत संघ और हसिरू सेना के प्रदेश अध्यक्ष चुनप्पा पुजेरी के नेतृत्व में हुबली की ओर पदयात्रा कर रहे हैं. उनके आंदोलन को कब्बू बेलेगारारा ओक्कूटा, संयुक्त किसान मोर्चा और दूसरे संगठनों का समर्थन मिला है. लिंगायत समुदाय के दो प्रभावशाली संतों, इंचिगेरी मठ के शशिकांत पडसलगी गुरु और शिरहट्टी फकीरेश्वर मठ के फकीरा डिंगलेश्वर स्वामी ने भी किसानों का समर्थन किया है. उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं. कुछ अन्य संतों ने भी किसानों के आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई है.
वहीं, शेतकरी संगठन के संयोजक राजू शेट्टी भी नई दिल्ली में हुई बैठक में शामिल हुए थे. उन्होंने कहा कि खुले बाजार में चीनी पहले से ही 50 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है. सरकार को बस इसकी कीमत आधिकारिक रूप से तय करने की जरूरत है. उनके मुताबिक, इससे चीनी मिलों को फायदा होगा और इसका लाभ किसानों को भी मिल सकेगा. शेट्टी ने इथेनॉल उत्पादन से होने वाली कमाई में भी किसानों की हिस्सेदारी तय करने की मांग की. उन्होंने कहा कि किसानों को हर लीटर इथेनॉल के उत्पादन पर 60 रुपये मिलने चाहिए. वहीं, चुनप्पा पुजेरी का कहना है कि किसानों का आंदोलन किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि शोषण करने वाली व्यवस्था के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि चीनी मिल मालिक अपने कारोबार का विस्तार कर रहे हैं, जबकि गन्ना किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं और गरीबी में जीवन जी रहे हैं.