Success Story: सोलर पंप ने बदली किसान की किस्मत, 3 एकड़ में अमरूद उगाकर कमाए 20 लाख – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Success Story: झारखंड के पहाड़ी इलाकों में खेती के लिए पानी पहुंचाना किसानों के सामने बड़ी चुनौती है. कभी बारिश कम होती है तो कभी जरूरत से ज्यादा, जिससे फसलों की पैदावार प्रभावित होती है. लेकिन अब सौर ऊर्जा से चलने वाली लिफ्ट सिंचाई और ड्रिप तकनीक किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है. खूंटी जिले के शिल्दा बड़ा टोली के किसान कैसर अली ने इस तकनीक का इस्तेमाल करके खेती और बागवानी में अच्छी सफलता हासिल की है. उन्होंने करीब 3 एकड़ जमीन पर ताइवान पिंक किस्म के लगभग 5,000 अमरूद के पौधे लगाए हैं.

कैसर अली ने 3 एकड़ में लगाए 5 हजार अमरूद के पौधे

खूंटी जिले के शिल्दा बड़ा टोली के किसान कैसर अली ने सोलर पंप मिलने के बाद पहले सब्जियों की खेती शुरू की. इसके बाद उन्होंने अमरूद की बागवानी करने का फैसला किया. करीब 3 एकड़ जमीन पर ताइवान पिंक किस्म के लगभग 5,000 पौधे लगाए. कैसर अली ने पीटीआई से बताया कि दो-तीन साल की मेहनत के बाद बागवानी से उन्हें अच्छा मुनाफा  मिलने लगा. इस साल करीब 20 टन अमरूद का उत्पादन हुआ और इससे लगभग 20 लाख रुपये की आमदनी हुई. उनकी सफलता बताती है कि आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाकर किसान पारंपरिक खेती के साथ फल उत्पादन से भी कमाई बढ़ा सकते हैं.

सोलर लिफ्ट सिंचाई से खेतों तक पहुंच रहा पानी

झारखंड के पथरीले इलाकों में ऊंचाई पर स्थित खेतों तक पानी पहुंचाना आसान नहीं होता. ऐसे में सौर ऊर्जा आधारित लिफ्ट सिंचाई व्यवस्था किसानों  के लिए मददगार साबित हो रही है. इसके तहत नदी, तालाब और दूसरे जल स्रोतों से सोलर पंप की मदद से पाइपलाइन के जरिए पानी खेतों तक पहुंचाया जाता है. इससे किसानों को सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप बिजली और डीजल पर होने वाला खर्च भी कम करने में मदद करते हैं. इसके साथ ड्रिप इरिगेशन के जरिए पौधों की जड़ों तक जरूरत के मुताबिक पानी पहुंचाया जा सकता है.

JSLPS के जरिए किसानों को मिल रही सुविधा

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के स्टेट इरिगेशन सेल की ओर से राज्य में लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं  चलाई जा रही हैं. इसके तहत करीब 10 से 12 प्रखंडों में सिंचाई से जुड़े काम हो रहे हैं. किसानों को सोलर पंप और दूसरी जरूरी सुविधाएं देकर आधुनिक सिंचाई अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. जिन क्षेत्रों में नदी, तालाब या अन्य जल स्रोत उपलब्ध हैं, वहां इन स्रोतों से पानी उठाकर खेतों तक पहुंचाया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा देकर खेती और बागवानी का दायरा बढ़ाना है.

लिफ्ट सिंचाई और बागवानी का फायदा केवल किसानों तक सीमित नहीं है. अमरूद के पौधों की देखभाल, फलों की तुड़ाई और दूसरे कृषि कार्यों में स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है. एक महिला श्रमिक के मुताबिक, पहले काम की तलाश में रांची जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही रोजगार मिलने लगा है. यहां काम करके महिलाएं रोजाना करीब 400 रुपये तक कमा सकती हैं. इस तरह सोलर सिंचाई और बागवानी से किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार हो रहे हैं.

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