Makhana News: बरसाती नदी में किसानों ने उगाया मखाना, ट्रेनिंग लेकर नकदी फसल से जुड़ रहे युवा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: बिहार का चंपारण कभी अपने जलाशयों और नदी क्षेत्रों में होने वाली मखाने की खेती से चर्चा में था, अब एक बार फिर से पूर्वी चंपारण में यह पहचान लौट आई है. मोतिहारी जिले के बंजरिया प्रखंड में बहने वाली धनौती नदी में किसानों की पहल और उद्यान विभाग के प्रोत्साहन और ट्रेनिंग के चलते मखाने की खेती को नया विस्तार मिल रहा है. स्थानीय स्तर पर मखाना उत्पादन को ग्रामीण आय और रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इलाके में नदी के साथ ही अन्य जलाशयों को मिलाकर करीब 50 एकड़ में मखाना उत्पादन किया जा रहा है.

मोतिहारी जिला उद्यान विभाग के अनुसार धनौती नदी क्षेत्र में मखाना की खेती कोई नई गतिविधि नहीं है. स्थानीय किसानों के अनुसार पहले इस क्षेत्र में नदी और तालाबों में बड़े पैमाने पर मखाने की खेती होती थी. हालांकि, समय के साथ जलस्रोतों में गाद और जलकुंभी की समस्या तथा खेती और फसल निकालने के लिए कुशल श्रमिकों की कमी के कारण इसका दायरा लगातार घटता गया. हाल के वर्षों में उद्यान विभाग की पहल से किसानों के बीच इस पारंपरिक खेती को फिर से बढ़ावा मिलने लगा है.

उद्यान विभाग के अनुसार बंजरिया क्षेत्र के किसान ललन कुमार सहनी ने धनौती नदी के हिस्से को पट्टे पर लेकर मखाने की खेती कर रहे हैं. इस क्षेत्र में इस साल करीब 40 से 50 एकड़ में मखाने की फसल तैयार की जा रही है. धनौती नदी क्षेत्र में ललन कुमार सहनी की ओर से पिछले कई वर्षों से मखाने की खेती की जा रही है. उन्होंने कहा कि नदी के पानी और कीचड़ के बीच मखाने की फसल तैयार होने के बाद अब इसके कच्चे फलों को निकालने का काम चल रहा है. पौधों और फलों में कांटे होने के कारण पानी के भीतर से फसल निकालने के लिए विशेष सावधानी और अनुभव की जरूरत होती है.

धनौती नदी में स्थानीय मजदूर पानी के भीतर उतरकर कीचड़ में दबे मखाने के फलों की तलाश कर उन्हें बाहर निकालते हैं. इसके लिए बांस से तैयार पारंपरिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाता है. स्थानीय मजदूर रामेश्वर चौधरी के अनुसार मखाने की रोपाई मार्च-अप्रैल के आसपास की गई थी और करीब 5 महीने बाद फसल तैयार हुई. उनका कहना है कि पानी के भीतर से मखाने का फल निकालने की यह तकनीक उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखी है. इस तरह मखाने की खेती के साथ एक पारंपरिक कौशल भी नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है.

बिहार सरकार मखाना क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से लेकर प्रशिक्षण, बीज वितरण, कटाई-पश्चात प्रबंधन, ब्रांडिंग, बाजार और निर्यात तक की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत करने पर जोर दे रही है. उद्यान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर मखाना विकास के लिए उत्पादन, प्रशिक्षण, कौशल विकास, उपकरण और बाजार व्यवस्था से संबंधित सहायता का प्रावधान दर्ज है. जिला उद्यान पदाधिकारी विकास कुमार के अनुसार पूर्वी चंपारण में भी मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभागीय स्तर पर किसानों को योजना से जोड़ने और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.

धनौती नदी के तल से मखाना के बीज निकालता किसान.

धनौती नदी में मखाने की खेती अब दूसरे इलाकों के किसानों और युवाओं को भी आकर्षित कर रही है. बेतिया समेत आसपास के क्षेत्रों से युवा किसान यहां पहुंचकर खेती की प्रक्रिया को समझ रहे हैं. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती से जुड़ने वाले युवा किसान रंजीत चौधरी ने बताया कि वह मखाने की खेती की तकनीक समझने के लिए धनौती नदी पहुंचे हैं. उन्होंने मखाना कारोबार और संभावित निर्यात से जुड़ने की इच्छा भी जताई. इसी तरह अनुज सिंह ने भी मखाने की खेती सीखने में रुचि जताई. उन्होंने बताया कि वह रोपाई से लेकर पानी के भीतर से कच्चे फल निकालने तक की पूरी प्रक्रिया को समझना चाहते हैं, ताकि आगे स्वयं इस खेती से जुड़ सकें.

मिथिला मखाना को 2022 में जीआई टैग मिला था. डाक विभाग की जीआई उत्पाद पुस्तिका में इसका जीआई नंबर 696 दर्ज है. इससे मखाने की क्षेत्रीय पहचान और बाजार की संभावनाओं को मजबूती मिली है. केंद्र और राज्य स्तर पर मखाना क्षेत्र को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और निर्यात तक बढ़ावा देने की पहल भी जारी है. अगस्त 2026 में बिहार से जीआई-टैग वाले मिथिला मखाने की पहली वाणिज्यिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने की जानकारी केंद्र सरकार ने दी थी.

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