पराली जलाने में यूपी में सबसे आगे निकला मथुरा, 73 घटनाएं दर्ज.. 21 किसानों पर लगा जुर्माना – एग्रीवेट

Team Agrivate
7 Min Read
पराली जलाने में यूपी में सबसे आगे निकला मथुरा, 73 घटनाएं दर्ज.. 21 किसानों पर लगा जुर्माना - एग्रीवेट - पराली जलाने में

एग्रीवेट: UP Stubble Burning Cases: खेतों में धान की कटाई का काम चल रहा है और इसके साथ ही पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं. प्रशासन की चेतावनी और जुर्माने के बावजूद किसान खेतों में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में मथुरा पहले नंबर पर पहुंच गया है. यहां 15 सितंबर से 2 नवंबर के बीच पराली जलाने की 73 घटनाएं सामने आई हैं. प्रशासन ने ऐसे मामलों में 21 किसानों पर कार्रवाई करते हुए जुर्माना भी लगाया है, लेकिन पूरी रकम की वसूली अभी नहीं हो पाई है.

पराली जलाने में मथुरा सबसे आगे, अलीगढ़ दूसरे नंबर पर

आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 2 नवंबर तक मथुरा में पराली जलाने की 73 घटनाएं दर्ज की गईं. इसके साथ ही जिला प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया है. वहीं, अलीगढ़ 39 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है. बाकी जिलों की बात करें तो पीलीभीत में 17, फर्रुखाबाद में 14 और गौतमबुद्ध नगर में 13 घटनाएं सामने आई हैं.

21 किसानों पर 1.45 लाख रुपये का जुर्माना, वसूली सिर्फ 30 हजार

पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से किसानों पर जुर्माना लगाया जा रहा है. मथुरा में अब तक 21 किसानों पर कुल 1 लाख 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. हालांकि, इसमें से अभी तक सिर्फ 30 हजार रुपये ही वसूले जा सके हैं. यानी जुर्माने की बड़ी रकम अब भी बाकी है.

प्रशासन की सख्ती के बाद भी खेतों में आग लगाने की घटनाएं जारी हैं. ऐसे में अधिकारियों के सामने पराली जलाने से रोकने के साथ-साथ किसानों को इसके दूसरे इस्तेमाल के बारे में समझाने की चुनौती भी है.

मथुरा में पराली जलाने के मामले ज्यादा होने की एक बड़ी वजह धान की जल्दी बुवाई और कटाई को माना जा रहा है. जिले में धान की खेती करीब 1 लाख 7 हजार हेक्टेयर जमीन पर होती है. ज्यादातर इलाकों में धान की कटाई हार्वेस्टर मशीन से की जाती है. इससे फसल के डंठल और बाकी हिस्सा खेत में ही रह जाता है.

दूसरी ओर, किसान अगली फसल की बुवाई के लिए खेत जल्दी खाली करना चाहते हैं. ऐसे में कुछ किसान पराली को हटाने के लिए उसमें आग लगा देते हैं. इससे खेत में बचा फसल अवशेष तो जल जाता है, लेकिन धुएं से आसपास के इलाकों में प्रदूषण भी बढ़ता है और मिट्टी को भी नुकसान पहुंच सकता है.

किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग दूसरे विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है. किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और बेलर जैसी मशीनों पर सब्सिडी दी जा रही है. इन मशीनों की मदद से पराली को खेत में ही संभाला जा सकता है या उसे इकट्ठा करके दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा किसानों को पराली से खाद बनाने और उसे भूसे के रूप में इस्तेमाल करने के तरीके भी बताए जा रहे हैं. कृषि विभाग के कर्मचारी गांव-गांव जाकर किसानों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें जागरूक कर रहे हैं.

पराली जलाने पर कितना लगता है जुर्माना?

नियमों के मुताबिक, खेत में पराली जलाने पर जमीन के रकबे के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है.

2 एकड़ से कम जमीन पर 2,500 से 5,000 रुपये तक जुर्माना.

2 से 5 एकड़ तक जमीन पर 5,000 रुपये जुर्माना.

5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर 15,000 से 30,000 रुपये तक जुर्माना.

ऐसे में किसानों के लिए बेहतर है कि पराली जलाने के बजाय मशीनों, खाद बनाने या दूसरे उपयोगी तरीकों से उसका निपटारा करें. इससे जुर्माने से बचने के साथ खेत और आसपास के वातावरण को भी नुकसान से बचाया जा सकता है.

Share This Article