एग्रीवेट: महाराष्ट्र के पुणे जिले के धान उत्पादक इलाकों में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. शुक्रवार और शनिवार को हुई तेज बारिश से खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. अधिकारियों को आशंका है कि इससे जिले में धान का उत्पादन घट सकता है. वहीं, कृषि विभाग ने बारिश से प्रभावित तहसीलों के अधिकारियों को फसल नुकसान का आकलन करने के लिए पंचनामा करने के निर्देश दिए हैं. जबकि, किसानों ने मांग की है कि नुकसान का सर्वे जल्द पूरा किया जाए और खेतों में खड़ी व कटाई के बाद खराब हुई फसल, दोनों के लिए मुआवजा दिया जाए. किसानों का कहना है कि उन्हें जल्द आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, ताकि नुकसान की भरपाई हो सके.
दरअसल, पिछले करीब दो महीने से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान पहले ही फसल बचाने के लिए परेशान थे. लंबे समय तक बारिश की कमी से धान की फसल की बढ़वार प्रभावित हुई थी और पैदावार घटने की आशंका थी. अब शनिवार को हुई तेज बारिश ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. जिन किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी थी, उनकी फसल भी बारिश में खराब हो गई है. किसान अब बची हुई फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
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कृषि विभाग के मुताबिक, सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हुआ है, जिन्होंने कटाई के बाद धान को सूखने के लिए खेतों में छोड़ दिया था. लंबे समय तक कीचड़ भरे पानी में पड़े रहने से धान की गुणवत्ता खराब हो सकती है. ऐसे अनाज का इस्तेमाल खाने के लिए करना मुश्किल हो सकता है. किसानों को इसे कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
भोर तहसील के हिरडोशी, विसगांव और चालीसगांव खोर इलाकों में बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. कई जगहों पर तेज बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर गिर गई. वहीं, कटाई के बाद खेतों में रखी फसल भी पानी में बह गई. अधिकारियों के मुताबिक, बारिश से पशुओं के चारे के लिए इस्तेमाल होने वाली घास को भी नुकसान पहुंचा है. इससे उन पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है, जो मवेशियों के चारे के लिए खेतों की घास और फसल के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं.
जिला कृषि अधिकारी वैभव तांबे ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस बेमौसम बारिश से धान किसानों को दोहरा नुकसान हुआ है. पहले कम बारिश के कारण फसल प्रभावित हुई और अब खेत पानी में डूब गए हैं. इससे धान का उत्पादन काफी घट सकता है. वहीं, बारिश ने छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. इन किसानों ने मॉनसून की अनिश्चितता के बावजूद खेती पर पैसा लगाया था. अंबेगांव तहसील के किसान और सामाजिक कार्यकर्ता विजय लेंभे ने बताया कि इस इलाके के कई गांवों में धान ही किसानों की मुख्य फसल है. इस साल पैदावार इतनी कम हुई है कि किसानों के लिए अपने परिवार की जरूरत पूरी करना भी मुश्किल हो सकता है. इसके अलावा, कई किसानों को आने वाले महीनों में पानी की कमी की चिंता भी सता रही है.