कपास की कीमतों में उछाल, 68000 रुपये प्रति कैंडी पहुंचा भाव.. किसानों की बढ़ी कमाई की उम्मीद – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: नई फसल की धीमी आवक और कम बारिश के चलते उत्पादन घटने की आशंका से कपास की कीमतों में तेजी आई है. पिछले सप्ताह कपास का भाव करीब 3,000 से 4,000 रुपये प्रति कैंडी बढ़कर 68,000 रुपये तक पहुंच गया. कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि किसानों ने भी आने वाले दिनों में भाव बढ़ने की उम्मीद में अपनी उपज रोकनी शुरू कर दी है. इससे कीमतों में और तेजी आई है. हालांकि, कपास की कीमतों में यह तेजी इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) में दिसंबर और मार्च के वायदा सौदों में आई मजबूती के अनुरूप है. इस बीच, भारतीय कपास निगम (CCI) ने 2025-26 की फसल के लिए सभी राज्यों में नीलामी की कीमत 500 रुपये प्रति कैंडी बढ़ा दी है. एक कैंडी में 356 किलो कपास होता है.

कपास के नए सीजन 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है. पहले नौ दिनों में नई फसल की कुल आवक  करीब 5 लाख गांठ तक पहुंच गई. सोमवार को देशभर में लगभग 78,000 गांठ कपास मंडियों में पहुंचा. इसमें उत्तर भारत में करीब 17,000 गांठ, मध्य प्रदेश में 16,000 गांठ, गुजरात में 15,000 गांठ, कर्नाटक में 9,000 गांठ, आंध्र प्रदेश में 8,000 गांठ, महाराष्ट्र में 7,000 गांठ और तेलंगाना में 6,000 गांठ कपास की आवक हुई.

राधालक्ष्मी ग्रुप के CMD अतुल एस गणात्रा ने बिजनेसलाइन से कहा कि गुजरात में एस6 किस्म की कपास का भाव सोमवार को बढ़कर 68,000 रुपये प्रति कैंडी हो गया, जबकि 30 सितंबर को यह 64,000 रुपये था. यानी कीमत में 4,000 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल के मुकाबले इस बार फसल काफी कम रहने की आशंका से कीमतों को समर्थन मिल रहा है. गणात्रा के मुताबिक, मौजूदा भाव पर कपड़ा मिलों की ओर से कपास की अच्छी मांग है.

CotYarn Trade Link के आनंद पोपट ने अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर में कहा कि सीमित उपलब्धता और कपड़ा मिलों की मांग बढ़ने की उम्मीद से पिछले सप्ताह भारतीय कपास की कीमतों में अच्छी तेजी आई. नई फसल की आवक बढ़ने के बावजूद अक्टूबर में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कपास उपलब्ध नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि कई कताई मिलों के पास कपास का स्टॉक कम है. साथ ही, घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में कपास का आयात करना पड़ सकता है. इससे बाजार में कपास की मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है.

पोपट के मुताबिक, मांग और आपूर्ति की मौजूदा स्थिति भारतीय कपास बाजार के लिए अनुकूल है. हालांकि, नई फसल की आवक बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव से निकट अवधि में उतार-चढ़ाव हो सकता है. इसके बावजूद बाजार में तेजी बने रहने की संभावना है. कपास की आवक कम होने से बाजार में इसकी मांग बढ़ गई है. रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बू़ब ने कहा कि स्थानीय बाजार में कपास की अच्छी मांग है. खरीदार भी खरीदारी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. पिछले 10 दिनों में कपास की कीमत करीब 3,000 रुपये प्रति कैंडी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि सोमवार को कर्नाटक के रायचूर में कपास का भाव बढ़कर 9,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, जबकि पहले यह 9,500 रुपये था. वहीं, तेलंगाना में कपास की कीमत करीब 9,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है.

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