एग्रीवेट: पंजाब में धान की कटाई के इस सीजन में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी आई है. पिछले 24 घंटे में पराली जलाने के 194 नए मामले सामने आए हैं. यह इस सीजन में एक दिन में दर्ज की गई सबसे अधिक घटनाएं हैं. इसके साथ ही राज्य में पराली जलाने के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,007 हो गई है. यह तेजी ऐसे समय आई है, जब पंजाब में धान की 64.5 फीसदी कटाई पूरी हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि तक 69.49 फीसदी धान की कटाई हो चुकी थी. यानी इस साल धान की कटाई की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले धीमी है. इसका मतलब है कि इस सीजन में अभी भी खेतों में धान की काफी फसल खड़ी है. ऐसे में जैसे-जैसे कटाई तेज होगी, पराली जलाने की घटनाएं और बढ़ने की आशंका है.
जिलों की बात करें तो तरनतारन में सबसे ज्यादा 397 मामले सामने आए हैं. इसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले दर्ज किए गए हैं. इन तीन जिलों में ही राज्य में पराली जलाने की कुल घटनाओं में से करीब 67 फीसदी मामले सामने आए हैं.
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक, 29 अक्टूबर तक पंजाब में पराली जलाने की 1,007 घटनाएं दर्ज की गई हैं. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,216 था. यानी इस साल अब तक पिछले साल के मुकाबले 209 मामले कम हैं. हालांकि, पिछले 24 घंटे में पराली जलाने की घटनाओं में आई तेजी ने चिंता बढ़ा दी है. आशंका है कि आने वाले दिनों में धान की कटाई बढ़ने के साथ खेतों में आग लगाने के मामले भी बढ़ सकते हैं. ऐसे पंजाब में हर साल 15 सितंबर से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने की प्रक्रिया शुरू होती है. यह धान की सरकारी खरीद शुरू होने यानी 1 अक्टूबर से करीब दो हफ्ते पहले है.
सैटेलाइट से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है. साल 2022 में पराली जलाने के 49,922 मामले दर्ज किए गए थे. यह संख्या 2023 में घटकर 36,663, 2024 में 10,909 और 2025 में 5,114 रह गई. ये आंकड़े हर साल 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच के हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में अब तक 778 खेतों का निरीक्षण किया गया है. इनमें से 379 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है. इसके अलावा, नोडल और निगरानी अधिकारियों को 426 चेतावनी और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. पिछले साल इसी अवधि में ऐसे 418 नोटिस जारी हुए थे. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि सरकार की कोशिशों के बावजूद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं जारी हैं. सरकार किसानों को पराली का खेत में ही प्रबंधन करने और उसे खेत से बाहर इस्तेमाल करने के लिए मशीनें उपलब्ध करा रही है. इसके साथ ही जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और निगरानी टीमें भी तैनात हैं. इसके बावजूद कुछ किसान अगली फसल की तैयारी के लिए खेत जल्दी खाली करने के मकसद से पराली जला रहे हैं. ऐसे में पराली प्रबंधन को लेकर सरकारी प्रयासों और खेतों की वास्तविक स्थिति के बीच अभी भी अंतर बना हुआ है.