बाजरे की इस किस्म ने किसान को बनाया लखपति, 6 एकड़ से 6.59 लाख रुपये की कमाई, दोगुनी पैदावार – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Success Story: खेती में नई तकनीक और उन्नत बीजों का इस्तेमाल किसानों की कमाई बढ़ाने में कितना मददगार हो सकता है, इसका उदाहरण कर्नाटक के 72 वर्षीय किसान के. चिक्कना ने पेश किया है. पहले पारंपरिक तरीके से बाजरे की खेती करने वाले इस किसान की छह एकड़ जमीन से आय करीब 2.07 लाख रुपये थी, लेकिन उन्नत एचआर-13 किस्म और वैज्ञानिक खेती अपनाने के बाद यह बढ़कर लगभग 6.59 लाख रुपये पहुंच गई. खास बात यह है कि बाजरे की पैदावार भी दोगुनी से ज्यादा हो गई. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान के तकनीकी मार्गदर्शन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद से किसान को बेहतर आमदनी हासिल करने में मदद मिली.

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, कर्नाटक के बॉम्ब्राहल्ली गांव के किसान के. चिक्कना कई वर्षों से पारंपरिक किस्मों के बाजरे की खेती कर रहे थे. सिंचित परिस्थितियों में उन्हें प्रति एकड़ लगभग 9 से 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था. रबी सीजन 2025 में उन्होंने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया. किसान ने भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान की ओर से उपलब्ध कराई गई उन्नत एचआर-13 किस्म अपनाई. इस बदलाव के बाद बाजरे की पैदावार बढ़कर 22 से 23 क्विंटल प्रति एकड़ पहुंच गई. यानी पहले के मुकाबले उत्पादन दोगुने से भी ज्यादा हो गया.

किसान को एचआर-13 किस्म के बीज कुसुमागिरी किसान उत्पादक संगठन  के माध्यम से उपलब्ध कराए गए. इसके साथ ही ICAR-IIMR के वैज्ञानिकों ने खेती की उन्नत तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया. किसान ने रोपाई की बेहतर विधि, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाया. इन उपायों से फसल की बढ़वार और उत्पादन में सुधार हुआ. यह अनुभव दिखाता है कि अच्छी किस्म के बीज के साथ वैज्ञानिक सलाह और सही फसल प्रबंधन भी जरूरी है.

एचआर-13 बाजरा किस्म ने बढ़ाई पैदावार, किसान को मिला फायदा.

बाजरे की पैदावार बढ़ने  के साथ किसान को उपज बेचने में भी फायदा मिला. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से उनकी उपज की खरीद 4,886 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई. इससे उन्हें बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव की चिंता कम रही. बेहतर उत्पादन और निर्धारित कीमत पर खरीद के चलते छह एकड़ से उनकी आय करीब 2.07 लाख रुपये से बढ़कर 6.59 लाख रुपये हो गई. इस तरह आय में लगभग 4.52 लाख रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, यह कुल आय का आंकड़ा है, शुद्ध मुनाफे का नहीं.

इस किसान की सफलता दूसरे बाजरा उत्पादकों के लिए भी उपयोगी उदाहरण है. बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी  के अनुसार उपयुक्त उन्नत किस्म का चुनाव करना चाहिए. इसके अलावा, संतुलित खाद प्रबंधन, समय पर सिंचाई और फसल की नियमित निगरानी जरूरी है. किसान कृषि विज्ञान केंद्रों और किसान उत्पादक संगठनों से तकनीकी जानकारी हासिल कर सकते हैं.

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