दिल्ली की हवा पर पराली का असर कम, पंजाब-हरियाणा में आग की घटनाएं 201 से घटकर 193 हुईं, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: दिल्ली की हवा में प्रदूषण के लिए पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की भूमिका उम्मीद से कम हो सकती है. दिल्ली स्थित जलवायु अनुसंधान संगठन क्लाइमेट ट्रेंड्स की बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच सितंबर-अक्टूबर के दौरान दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर पराली जलाने का असर बहुत कम देखने को मिला. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ाने में स्थानीय और गैर-कृषि स्रोतों की भूमिका ज्यादा रही.

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से 2026 के बीच पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में केवल 4 फीसदी की कमी आई. इनकी संख्या 201 से घटकर 193 रह गई. इसके बावजूद दिल्ली के AQI में 15.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, 2024 से 2025 के बीच पराली जलाने की घटनाएं 88 फीसदी कम हुई थीं, लेकिन दिल्ली के AQI में सिर्फ 3.9 फीसदी की गिरावट आई. रिपोर्ट के ये आंकड़े संकेत देते हैं कि दिल्ली की हवा की गुणवत्ता पर असर डालने वाले अन्य स्थानीय कारकों की भी अहम भूमिका हो सकती है.

हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के AQI में सुधार के आंकड़े आम दिनों की प्रदूषण स्थिति को पूरी तरह नहीं दिखाते. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 से 2026 के बीच दिल्ली का औसत AQI 169.3 से घटकर 142.6 पर आ गया. यानी इसमें 15.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, औसत AQI पूरे महीने के हर दिन की रीडिंग को जोड़कर निकाला जाता है, जबकि मीडियन AQI में सभी दिनों की रीडिंग को कम से ज्यादा के क्रम में रखने पर बीच का आंकड़ा लिया जाता है. मीडियन AQI को आम दिनों में हवा की स्थिति समझने का बेहतर पैमाना माना जाता है, क्योंकि एक-दो दिन प्रदूषण बहुत ज्यादा होने से इस पर खास असर नहीं पड़ता.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के AQI में सुधार की मुख्य वजह प्रदूषण के सबसे खराब दिनों में कमी आना है. 2025 में AQI 200 से ऊपर रहने वाले 10 दिन थे, जो 2026 में घटकर सिर्फ 3 रह गए. इस साल AQI 300 के पार भी नहीं गया, जबकि पिछले साल यह 353 तक पहुंच गया था. विश्लेषण के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि सितंबर-अक्टूबर में दिल्ली की हवा कुल मिलाकर साफ हो गई, बल्कि प्रदूषण के बेहद खराब स्तर वाले दिनों की संख्या कम हुई है.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस साल सितंबर-अक्टूबर में मौसम की स्थितियां आमतौर पर प्रदूषण बढ़ाने वाली थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसकी एक वजह अल नीनो की मजबूत होती स्थिति और बारिश में कमी बताई गई है. 2025 की इसी अवधि के मुकाबले इस साल बारिश 78.2 फीसदी कम हुई. रिपोर्ट के अनुसार, इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि दिल्ली की हवा में बदलाव के पीछे स्थानीय प्रदूषण स्रोतों से निकलने वाले उत्सर्जन में बदलाव की भूमिका हो सकती है, न कि सिर्फ मौसम या पंजाब-हरियाणा के खेतों में पराली जलाने की.

Share This Article