एग्रीवेट: अल नीनो के असर से महाराष्ट्र और कर्नाटक में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ हो सकता है, लेकिन रबी फसलों पर इसका असर ज्यादा व्यापक और गंभीर होने की आशंका है. कई राज्यों में कम बारिश के कारण रबी फसलों की बुवाई में पहले ही देरी हो रही है. वहीं, खेतों में नमी की कमी और सिंचाई के लिए पानी का भंडार घटने से फसलों की बुवाई और पैदावार दोनों पर खतरा बढ़ गया है. ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण सर्दियों में होने वाली बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी. इससे बीजों के अंकुरण में मदद मिलेगी और सिंचाई पर निर्भरता भी कम होगी.
रबी फसलों की बुवाई मॉनसून के बाद सर्दियों में होती है. इन फसलों की बढ़वार के लिए खेतों में पहले से मौजूद नमी, सिंचाई और सर्दियों में होने वाली बारिश अहम होती है. उत्तर भारत में गेहूं की फसल के शुरुआती विकास के दौरान बारिश से मिट्टी में नमी बनी रहती है. वहीं, दलहन और तिलहन की खेती कई ऐसे क्षेत्रों में होती है, जहां किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में समय पर बारिश नहीं होने से किसान बुवाई टाल सकते हैं या फसल की बुवाई का रकबा घटा सकते हैं. वहीं, फसल की बढ़वार के दौरान नमी की कमी रहने से पैदावार भी कम हो सकती है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई प्रमुख कृषि राज्यों में बारिश की कमी से रबी फसलों की बुवाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अक्टूबर के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश हुई है. इससे खेतों में नमी की कमी हो सकती है और बुवाई पर असर पड़ने की आशंका है. वहीं, पंजाब और हरियाणा में अक्टूबर में अच्छी बारिश होने से किसानों को राहत मिली है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में सितंबर में सामान्य से 9 फीसदी कम बारिश हुई थी. वहीं, 1 से 18 अक्टूबर के बीच राज्य में सामान्य से 55 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. महाराष्ट्र में भी बारिश की स्थिति गंभीर है. राज्य की 358 तहसीलों में से 305 को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. महाराष्ट्र में अक्टूबर के पहले 18 दिनों में सामान्य बारिश का सिर्फ 3 फीसदी पानी बरसा, जबकि सितंबर में 52 फीसदी बारिश की कमी रही थी.
मध्य प्रदेश में सितंबर में सामान्य से 19 फीसदी अधिक बारिश हुई थी, लेकिन अक्टूबर में अब तक सामान्य से 96 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के दौरान सामान्य से 37 फीसदी कम बारिश हुई है. हालांकि, सितंबर में राज्य में सामान्य से 65 फीसदी अधिक बारिश हुई थी. इससे खेतों में नमी बनी रहने और रबी फसलों की बुवाई में मदद मिलने की उम्मीद है.
पंजाब और हरियाणा में अक्टूबर की बारिश से किसानों को राहत मिली है. पंजाब में सितंबर के दौरान सामान्य से 64 फीसदी कम बारिश हुई थी, लेकिन 1 से 18 अक्टूबर के बीच सामान्य से 256 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई. इसी तरह, हरियाणा में सितंबर में 44 फीसदी बारिश की कमी थी, जबकि अक्टूबर के पहले 18 दिनों में सामान्य से 191 फीसदी अधिक बारिश हुई. इस बारिश से खेतों में नमी बढ़ने की उम्मीद है. इससे किसान नवंबर के पहले सप्ताह में गेहूं की बुवाई सामान्य समय पर शुरू कर सकते हैं.
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान देश में रबी फसलों के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं. यहां गेहूं, सरसों, चना और मसूर की बड़े पैमाने पर खेती होती है. ऐसे में इन राज्यों में बारिश की कमी से रबी फसलों की बुवाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है. इसका असर देश के कुल खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन पर भी पड़ सकता है.कृषि मंत्रालय ने अभी रबी फसलों की बुवाई के साप्ताहिक आंकड़े जारी करना शुरू नहीं किया है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान में चने की बुवाई का रकबा 6,000 हेक्टेयर से कम है, जबकि सरसों की बुवाई करीब एक लाख हेक्टेयर में हुई है. ये आंकड़े रबी सीजन 2026-27 के लिए तय लक्ष्य से काफी कम हैं. राजस्थान में इस सीजन में 21.5 लाख हेक्टेयर में चना और 37.5 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है. इससे संकेत मिलता है कि राज्य में रबी फसलों की बुवाई धीमी गति से शुरू हुई है.
पूर्व कृषि आयुक्त जे. एस. संधू के मुताबिक, दलहन और तिलहन की फसलों पर बारिश की कमी का ज्यादा असर पड़ सकता है. रबी सीजन में इन फसलों के कुल रकबे का 60 से 70 फीसदी हिस्सा बारिश पर निर्भर रहता है. ऐसे में कम बारिश होने से इनकी बुवाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है. उन्होंने कहा कि सिंचाई की सुविधा वाले कुछ इलाकों में खेती जारी रह सकती है, लेकिन पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में भी पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है.