एग्रीवेट: हरियाणा के यमुनानगर जिले के चावल मिलर्स ने राज्य सरकार से क्षतिग्रस्त और बदरंग चावल की तय सीमा 3 फीसदी से बढ़ाकर 4.5 फीसदी करने की मांग की है. मिलर्स का कहना है कि मौजूदा धान खरीद सीजन के दौरान बेमौसम और लंबे समय तक हुई बारिश से धान की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. इससे चावल की मिलिंग के दौरान खराब दानों की मात्रा बढ़ने की आशंका है.
मिलर्स के मुताबिक, बारिश के कारण धान में कई तरह की खराबियां देखने को मिल रही हैं. इनमें दानों का ज्यादा क्षतिग्रस्त होना, दानों पर छोटे-छोटे धब्बे पड़ना और पानी के निशान होना शामिल है. ऐसे में चावल तैयार करते समय खराब दानों की मात्रा बढ़ सकती है. मिलर्स का कहना है कि अगर मौजूदा नियमों में बदलाव नहीं किया गया, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. उन्होंने राज्य सरकार से मौजूदा हालात को देखते हुए क्षतिग्रस्त और बदरंग चावल की तय सीमा बढ़ाने की अपील की है.
राइस मिलर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से चावल में क्षतिग्रस्त दानों की तय सीमा बढ़ाने की मांग की है. एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मनीष बंसल ने द ट्रिब्यून से कहा कि फिलहाल सरकार ने क्षतिग्रस्त चावल की अधिकतम सीमा 3 फीसदी तय की है. इसे बढ़ाकर 4.5 फीसदी किया जाना चाहिए, ताकि खराब गुणवत्ता वाले धान के कारण मिलर्स को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके.
मनीष बंसल के मुताबिक, जिले में रजिस्टर्ड चावल मिलों की संख्या इस साल 184 से घटकर 150 रह गई है. अगर मिलर्स की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह संख्या और कम हो सकती है. उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से यह भी मांग की है कि चावल उद्योग से जुड़े नियमों में बदलाव करने से पहले मिलर्स से सलाह ली जाए. मौजूदा नियमों की समीक्षा जरूरी है, ताकि मिलर्स को होने वाले अनावश्यक आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके. मिलर्स का कहना है कि सरकार समय पर कदम उठाती है, तो बेमौसम बारिश से पैदा हुई समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी. इससे धान की सरकारी खरीद के दौरान उसकी मिलिंग का काम भी सुचारू रूप से हो सकेगा.
बता दें कि हरियाणा बीते दिनों बारिश होने से मंडी में रखी धान की उपज पानी भीग गया. इससे गुणवत्ता पर असर पड़ा है. लेकिन सबसे अधिक नुकसान कैथल की अनाज मंडी में देखने को मिला. बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आई है. मंडी में फसल को ढकने के लिए पर्याप्त शेड नहीं होने के कारण किसानों की खुले में रखी फसल बारिश में भीगकर खराब हो गई. वहीं, कुछ बोरियों में रखा धान अंकुरित होने लगा.