खाद के साथ जबरन दूसरा सामान बेचा तो खैर नहीं! 9 हजार जांच के बाद 250 से ज्यादा डीलरों पर एक्शन – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Rajasthan Fertilizer News: खेती के सीजन में किसानों को समय पर खाद मिल जाए, यही उनकी सबसे बड़ी जरूरत होती है. लेकिन कई बार खाद की दुकानों पर किसानों को यूरिया या डीएपी के साथ जिंक, सल्फर और दूसरी चीजें भी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है. ऐसे में किसानों को जरूरत से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं. अब राजस्थान सरकार ने इस तरह की मनमानी करने वाले खाद विक्रेताओं के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है. कृषि विभाग ने प्रदेश में 9 हजार से ज्यादा जांच की हैं और गड़बड़ी मिलने पर 250 से अधिक डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की है. सरकार ने साफ किया है कि, सब्सिडी वाली खाद के साथ किसानों को जबरन कोई दूसरा सामान नहीं बेचा जा सकता.

राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने 23 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों में साफ किया है कि, खाद विक्रेता किसानों को यूरिया, डीएपी या दूसरी सब्सिडी वाली खाद के साथ कोई अतिरिक्त सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. कई बार दुकानदार किसानों से कहते हैं कि खाद तभी मिलेगी, जब वे उसके साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक या जैविक खाद भी खरीदेंगे. कृषि विभाग ने इस तरह की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं.

कृषि विभाग ने खाद और दूसरे कृषि उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों की निगरानी के लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया है. इस ऐप के जरिए जांच का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जा रहा है, ताकि अधिकारी आसानी से देख सकें कि कहां जांच हुई और क्या गड़बड़ी मिली. विभाग के मुताबिक, अब तक 9 हजार से ज्यादा जांच की जा चुकी हैं. इनमें खाद की कालाबाजारी, तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलने और जबरन दूसरा सामान बेचने जैसी गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं. इन मामलों में 250 से अधिक डीलरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.

सरकार ने साफ किया है कि, अगर किसानों को खाद के साथ जबरन दूसरा सामान बेचा जाता है, तो जांच केवल दुकानदार तक सीमित नहीं रहेगी. ऐसे मामलों में थोक विक्रेताओं, खाद बनाने वाली कंपनियों और सप्लाई करने वाली एजेंसियों की भूमिका भी देखी जाएगी. इसके लिए जिलों में विशेष जांच टीमें बनाई जाएंगी. ये टीमें खाद की दुकानों, गोदामों और कंपनियों के यहां अचानक पहुंचकर जांच कर सकेंगी. इस दौरान खाद का स्टॉक, बिक्री का रिकॉर्ड, बिल और दूसरे कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज भी देखे जाएंगे.

कृषि विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि, नियम तोड़ने वालों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाए. गड़बड़ी की गंभीरता और कानूनी प्रावधानों के आधार पर दुकानदार का खाद बेचने का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है. विभाग ने यह भी कहा है कि अगर कोई अधिकारी जांच करने या शिकायत पर कार्रवाई करने में लापरवाही बरतता है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी.

खाद की खरीदारी में परेशानी होने पर अब किसानों को शिकायत करने की सुविधा भी मिलेगी. कृषि विभाग ने सभी जिलों में खाद से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग शिकायत केंद्र या हेल्पलाइन बनाने के निर्देश दिए हैं. अगर किसी किसान से खाद के साथ जबरन दूसरा सामान खरीदने को कहा जाता है या तय कीमत से ज्यादा पैसे मांगे जाते हैं, तो वह अपने जिला कृषि कार्यालय में शिकायत कर सकता है.

विभाग के मुताबिक, ऐसी शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर शुरुआती कार्रवाई शुरू करनी होगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर शिकायत का समाधान 24 घंटे में ही हो जाएगा. शिकायत का निपटारा तय समय सीमा के भीतर किया जाएगा.

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