बकरी पालन शुरू करने पर मिलेगी 60 फीसदी सब्सिडी! जानें कौन-सी नस्ल देगी ज्यादा मुनाफा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Goat Farming: बकरी पालन किसानों के लिए कम लागत में अतिरिक्त कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है. सही नस्ल का चुनाव, संतुलित आहार और बेहतर देखभाल से किसान इस व्यवसाय को आगे बढ़ा सकते हैं. केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पात्र लाभार्थियों को बकरी पालन के लिए सब्सिडी भी दी जाती है. कुछ योजनाओं में अनुदान 50 से 60 प्रतिशत तक हो सकता है, हालांकि यह योजना की शर्तों और पात्रता पर निर्भर करता है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के पशु चिकित्सक डॉ. वाई.के. सोनी के अनुसार, बकरी पालन शुरू करने से पहले किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, चारे की उपलब्धता और बाजार की मांग के हिसाब से नस्ल का चयन करना चाहिए.

बकरी की नस्ल  चुनते समय किसान को अपने क्षेत्र और पालन के उद्देश्य का ध्यान रखना चाहिए. ब्लैक बंगाल नस्ल मांस की गुणवत्ता और प्रजनन क्षमता के लिए जानी जाती है. बरबरी नस्ल छोटे और मध्यम स्तर पर बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है. वहीं, जमुनापारी नस्ल अपने बड़े शरीर और दूध उत्पादन की क्षमता के लिए पहचानी जाती है. बीटल नस्ल भी दूध और मांस दोनों उद्देश्यों से पाली जाती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बकरी खरीदने से पहले स्थानीय मौसम के अनुकूल नस्ल की जानकारी पशुपालन विभाग से जरूर लें.

बकरी पालन के लिए किसान राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) और राज्य सरकार की संबंधित योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं. कुछ योजनाओं में पात्र लाभार्थियों को परियोजना के लिए पूंजीगत सब्सिडी दी जाती है. हालांकि, हर किसान को 60 प्रतिशत अनुदान मिलना तय नहीं है. सब्सिडी की राशि, पात्रता और शर्तें योजना के अनुसार अलग-अलग होती हैं. आवेदन करने से पहले जिला पशुपालन विभाग से जानकारी लें. परियोजना रिपोर्ट, आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण और अन्य दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है.

किसान शुरुआत में तीन से पांच मादा बकरियों  के साथ छोटा व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. इसके लिए बकरियों की खरीद, शेड निर्माण, चारा-पानी और दवाइयों का खर्च जोड़कर बजट बनाना जरूरी है. पांच मादा बकरियों से मिलने वाले बच्चों की संख्या नस्ल, उम्र, प्रजनन और देखभाल पर निर्भर करती है. कमाई का अनुमान लगाने से पहले स्थानीय बाजार में बकरियों की कीमत और बिक्री की मांग का आकलन करें.

बकरियों को साफ, हवादार और सूखे शेड में रखें. उनके लिए पर्याप्त खुली जगह, स्वच्छ पानी और पौष्टिक चारे की व्यवस्था करें. समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं और पशु चिकित्सक की सलाह से टीकाकरण व कृमिनाशक दवाएं दें. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान  के पशु चिकित्सक डॉ. वाई.के. सोनी के अनुसार, बकरी पालन में बेहतर प्रबंधन और स्वास्थ्य की देखभाल महत्वपूर्ण है. किसान इन बातों पर ध्यान देकर नुकसान का जोखिम कम कर सकते हैं और व्यवसाय को बेहतर ढंग से चला सकते हैं.

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