एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश में देसी गाय पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नंद बाबा मिशन के तहत पशुपालकों को प्रोत्साहित कर रही है. इस पहल का उद्देश्य देसी नस्लों का संरक्षण करने के साथ दूध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है. 10 देसी गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने पर 11 लाख रुपये तक अनुदान मिलने का प्रावधान बताया गया है. हालांकि, यह सहायता संबंधित योजना की पात्रता, निर्धारित शर्तों और स्वीकृति पर निर्भर करेगी. ऐसे में डेयरी व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे किसानों को आवेदन से पहले योजना की मौजूदा गाइडलाइन और अपने जिले में उपलब्ध सहायता की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, नंद बाबा मिशन के तहत देसी गायों के पालन, नस्ल संरक्षण और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं. इसके तहत 10 गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने पर 11 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान बताया गया है. इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालकों को पहले यह पता करना चाहिए कि उनके जिले में संबंधित योजना के तहत आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं या नहीं. अनुदान की वास्तविक राशि, पात्रता, स्वीकृत खर्च और भुगतान की प्रक्रिया की पुष्टि पशुपालन विभाग से करना जरूरी है. किसानों को बिना आधिकारिक जानकारी के डेयरी स्थापित करने पर होने वाली पूरी लागत को अनुदान मानकर नहीं चलना चाहिए.
देसी गायों की डेयरी शुरू करने के लिए सही नस्ल का चयन महत्वपूर्ण है. साहिवाल और रेड सिंधी जैसी नस्लें दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. हालांकि, गाय खरीदते समय केवल नस्ल के नाम पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है. उसकी उम्र, स्वास्थ्य, दूध देने की क्षमता और प्रजनन संबंधी जानकारी की जांच भी करनी चाहिए. किसानों को डेयरी शुरू करने से पहले पशुओं के लिए पर्याप्त जगह, साफ पानी, उचित शेड और नियमित पशु चिकित्सा की व्यवस्था करनी चाहिए. इससे पशुओं को स्वस्थ रखने और दूध उत्पादन को बेहतर ढंग से बनाए रखने में मदद मिलती है.
डेयरी व्यवसाय में अच्छी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाने के लिए सेक्स्ड सीमन तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तकनीक में मादा बछिया पैदा होने की संभावना सामान्य वीर्य की तुलना में अधिक होती है, लेकिन इसकी गारंटी नहीं होती. पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ या पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए. साथ ही, गायों के स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और नस्ल के अनुरूप तकनीक का चयन करना चाहिए. इससे भविष्य में डेयरी के लिए बेहतर पशु समूह तैयार करने में मदद मिल सकती है.
गाय पालन में चारे पर होने वाला खर्च डेयरी के मुनाफे को प्रभावित करता है. इसलिए किसानों को अपनी जमीन पर हरा चारा उगाने की योजना बनानी चाहिए. मल्टीकट चरी जैसी चारा फसलें उगाकर नियमित हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, सूखा चारा, संतुलित आहार, स्वच्छ पानी और समय पर टीकाकरण भी जरूरी है.
आवेदन कहां करें? देसी गाय पालन की यूनिट स्थापित करने के इच्छुक किसान अपने जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी या पशुपालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं. वहां नंद बाबा मिशन के तहत उपलब्ध योजनाओं, पात्रता, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लें. डेयरी शुरू करने से पहले गायों की खरीद, शेड निर्माण, चारा और इलाज सहित सभी खर्चों का बजट तैयार करना चाहिए. इससे सरकारी सहायता के साथ कारोबार की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी.