एग्रीवेट: Livestock Feed Prices: पशुओं और मुर्गियों को खिलाए जाने वाले आहार की कीमतें बढ़ने से पोल्ट्री और डेयरी कारोबार से जुड़े किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. आहार बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई चीजों के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे मुर्गी पालन करने वाले किसानों को करीब 15 फीसदी तक नुकसान उठाना पड़ रहा है. वहीं, सूखे से प्रभावित इलाकों में डेयरी किसानों को पशुओं के लिए पर्याप्त चारा जुटाने में परेशानी हो रही है. दूसरी ओर, आहार बनाने वाली कंपनियों पर भी दबाव बढ़ा है, क्योंकि महंगे उत्पादों की मांग प्रभावित हो रही है. उद्योग से जुड़े लोगों ने सरकार से मक्का के आयात में राहत देने और इंसानों के खाने योग्य नहीं बचे अनाज के भंडार को पशु आहार में इस्तेमाल करने की मांग की है.
द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए बढ़ती लागत बड़ी समस्या बन गई है. मुर्गियों को खिलाने वाले आहार की कीमत बढ़ने से उत्पादन खर्च में इजाफा हुआ है. वहीं, बाजार में कमजोर मांग के कारण किसान अपने उत्पादों के दाम उतनी तेजी से नहीं बढ़ा पा रहे हैं. इसका सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ रहा है. उद्योग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, पोल्ट्री किसानों को करीब 15 फीसदी तक नुकसान हो रहा है. यदि आहार की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो छोटे और मध्यम स्तर के पोल्ट्री कारोबारियों के लिए खर्च संभालना और मुश्किल हो सकता है.
पशु और मुर्गी आहार बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, सरसों की खली के दाम 75 फीसदी तक बढ़ गए हैं. वहीं, डी-ऑयल्ड राइस ब्रान मील 68 फीसदी और कॉर्न डीडीजीएस 66 फीसदी महंगा हुआ है. इसके अलावा, मूंगफली की खली की कीमत में 43 फीसदी और मक्का के दाम में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. ये सभी चीजें पशु और पोल्ट्री आहार तैयार करने में इस्तेमाल होती हैं. इनकी कीमत बढ़ने से आहार बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ गई है. इसका असर किसानों के खर्च पर भी पड़ रहा है.
पशु आहार महंगा होने के साथ सूखे से प्रभावित इलाकों में डेयरी किसानों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं. इन क्षेत्रों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा जुटाना आसान नहीं है. चारे की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण दूध उत्पादन करने वाले किसानों का खर्च बढ़ सकता है. डेयरी कारोबार में पशुओं को संतुलित आहार देना जरूरी होता है, ताकि उनकी सेहत और दूध उत्पादन पर बुरा असर न पड़े. लेकिन चारा महंगा होने पर किसानों के लिए पशुओं की जरूरत पूरी करना चुनौती बन जाता है. वहीं, दूध की मांग कमजोर रहने पर बढ़ी लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालना भी मुश्किल होता है.
द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, पशु आहार उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से मक्का के आयात में राहत देने की मांग की है. इसके साथ ही ऐसा खाद्यान्न, जो इंसानों के खाने योग्य नहीं रह गया है, उसे पशु आहार में इस्तेमाल करने की अनुमति देने की अपील की गई है. मक्का की उपलब्धता कम होने से भी आहार की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. कमजोर मानसून के कारण मक्का का उत्पादन प्रभावित हुआ है. दूसरी ओर, इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां भी मक्का की खरीद कर रही हैं. इससे पशु आहार और इथेनॉल उद्योग के बीच मक्का की मांग को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. अब किसानों और आहार निर्माताओं को राहत देने के लिए मक्का की उपलब्धता और कीमतों पर ध्यान देना जरूरी होगा.