एग्रीवेट: देश में पिछले एक साल में 42 जरूरी चीजों में से 41 की खुदरा कीमतें बढ़ गई हैं. केवल आलू की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान प्याज की कीमतों में सबसे ज्यादा करीब 113 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, चीनी के दाम लगभग 22 फीसदी और सूरजमुखी तेल की कीमत करीब 18 फीसदी बढ़ गई.
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों का असर खुदरा महंगाई पर भी पड़ा है. सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर करीब दो साल के उच्च स्तर 5.5 फीसदी पर पहुंच गई. वहीं, सितंबर में खाद्य महंगाई दर सालाना आधार पर 7.74 फीसदी रही.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में दालों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. अरहर दाल का औसत खुदरा भाव सोमवार को बढ़कर करीब 129 रुपये प्रति किलो हो गया, जबकि एक साल पहले यह 113 रुपये प्रति किलो था. देश के चार बड़े महानगरों में अरहर दाल की कीमत 140 से 145 रुपये प्रति किलो के बीच रही. वहीं, चना दाल का औसत भाव एक साल में 6.4 फीसदी बढ़कर 91 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जो पिछले साल 85 रुपये था. ऐसे में कहा जा रहा है कि सरकार जल्द ही अपने बफर स्टॉक से चना बाजार में जारी करने पर विचार कर सकती है. इससे बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
खाने के तेलों में सूरजमुखी तेल की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है. इसका औसत खुदरा भाव करीब 18 फीसदी बढ़कर 191 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया. वहीं, पाम तेल की कीमत में 15.2 फीसदी और सोया तेल के दाम में 14.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसी तरह सरसों तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इसका औसत खुदरा भाव एक साल पहले के 188 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 204 रुपये हो गया है. वहीं, सामान्य चावल की कीमत करीब 12 फीसदी बढ़कर 47 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है. हालांकि, गेहूं और आटे की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है.
चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने में कुछ नरमी आई है. सोमवार को इसका औसत भाव घटकर 56 रुपये प्रति किलो रह गया, जबकि एक महीने पहले यह करीब 59 रुपये था. हालांकि, एक साल पहले के मुकाबले चीनी अब भी करीब 22 फीसदी महंगी है. इसकी वजह उम्मीद से कम उत्पादन होना बताया जा रहा है.
देश में प्याज की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को प्याज का औसत खुदरा भाव 53 रुपये प्रति किलो रहा. वहीं, आलू की कीमतों में एक साल के दौरान 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. दूसरी ओर, टमाटर का भाव एक साल पहले के 36 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 42 रुपये हो गया है. कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, महाराष्ट्र में खरीफ प्याज का उत्पादन 5 से 7 फीसदी तक घटने की आशंका है. महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है. वहां प्याज की बुवाई का रकबा घटने और मॉनसून की बारिश में देरी से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है. हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि खरीफ प्याज की नई फसल मंडियों में पहुंचने के बाद कीमतों में नरमी आएगी. इससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है.