तिलहन किसानों को मिलेंगे 1107 करोड़ रुपये, PSS पर सूरजमुखी-सोयाबीन की बंपर खरीद के निर्देश – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: कर्नाटक में तिलहन फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को इस बार बंपर भाव मिलने के साथ ही उनकी पूरी उपज खरीद की जाएगी. केंद्र सरकार ने सूरजमुखी, सोयाबीन, मूंग खरीद के लिए राज्य सरकार को फंड जारी कर दिया है. इसके साथ ही तीनों फसलों की खरीद का टारगेट भी तय कर दिया है. ऐसे में किसानों के समर्थन मूल्य मिलने का रास्ता साफ हो गया है और उन्हें निजी व्यापारियों के हाथों में औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचना नहीं पड़ेगा.

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बुधवार को बताया कि केंद्र ने 2026-27 के खरीफ सत्र के लिए कर्नाटक में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत राज्य के किसानों से सूरजमुखी, मूंग और सोयाबीन खरीद को मंजूरी दे दी है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि केंद्र सरकार ने किसानों से 13413 टन सूरजमुखी की खरीद टारगेट तय किया है. इसके साथ ही 38250 टन मूंग और 1,15,500 टन सोयाबीन की खरीद को मंजूरी दी है. इसके लिए राशि भी जारी की गई है.

कर्नाटक के दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों को उनकी उपज के लिए 1107 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. 659.27 करोड़ रुपये मूल्य की 1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन खरीद होगी. 335.83 करोड़ रुपये मूल्य की 38,250 मीट्रिक टन मूंग और 111.90 करोड़ रुपये मूल्य की 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी (सनफ्लावर) की खरीद समर्थन मूल्य पर की जाएगी.

उन्होंने कहा कि इन मंजूरियों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के जरिये किसानों को सहायता मिलेगी. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 29 सितंबर को तीन अलग-अलग पत्रों के जरिये कर्नाटक में इन तीन फसलों की मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीद को मंजूरी दी है. ये मंजूरियां कर्नाटक सरकार के अनुरोध के बाद दी गईं. पत्रों में सूरजमुखी और मूंग के लिए 11 अगस्त तथा सोयाबीन के लिए 17 अगस्त को राज्य सरकार की ओर से भेजे गए पत्रों का उल्लेख किया गया है.

केंद्र से मिले मंजूरी पत्र में फसलों की खरीद की अवधि शुरू होने की तारीख से 90 दिन तय की गई. इसकी शुरुआत की तारीख राज्य सरकार को तय करने के निर्देश दिए गए हैं. केंद्रीय नोडल एजेंसियों को खरीद शुरू होने की तारीख के बारे में केंद्र को सूचित करने को कहा गया है. एजेंसियों को खरीद शुरू करने से पहले वैज्ञानिक भंडारण के लिए उपलब्ध जगह की पुष्टि करने और केवल उतनी ही मात्रा में खरीद करने का निर्देश दिया गया है.

केंद्र ने कहा कि खरीद पंजीकृत किसानों के आधार आधारित ‘बायोमेट्रिक’ या चेहरे की पहचान के जरिये की जानी चाहिए और केवल उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) वाली उपज की खरीद की जानी चाहिए. खरीद उस समय की जाएगी, जब बाजार भाव एमएसपी से नीचे हों. राज्य सरकार से खरीद के तीन दिन के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान करने को कहा गया है. उसे पूरे पीएसएस परिचालन को मंडी कर या उपकर से मुक्त करने तथा केंद्रीय नोडल एजेंसियों की ओर से प्रत्यक्ष खरीद केंद्र स्थापित करने में सहयोग करने को भी कहा गया है.

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