आतंकी हमले का आरोपी बताकर बुजुर्ग किसान को 1 महीने डिजिटल अरेस्ट किया, 1.31 करोड़ रुपये ठगे – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: जालसाजों ने मुंबई पुलिस और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के अधिकारी बनकर 62 वर्षीय किसान को डिजिटल अरेस्ट कर लिया. जालसाजों ने किसान को पहलगाम आतंकी हमले में शामिल होने का आरोपी बताकर झांसे में लिया. किसान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह कुछ समझ नहीं सका और खुद को असहाय पाया. जालसाजों ने उसे सितंबर से अक्टूबर तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उससे अलग-अलग बैंक खातों में 1.31 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए.

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में जालसाजों ने मुंबई पुलिस और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के अधिकारी बनकर 62 वर्षीय एक किसान से कथित तौर पर 1.31 करोड़ रुपये की ठगी की. पीटीआई के अनुसार पुलिस ने सोमवार को मीडिया को यह जानकारी देते हुए बताया कि आरोपियों ने पहलगाम आतंकवादी हमले के एक आरोपी को धन अंतरित करने का आरोप लगाते हुए किसान को डिजिटल अरेस्ट कर लिया था.

पुलिस के अनुसार किसान को 2  सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और इस दौरान ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिये उसे धमकाया और विभिन्न बैंक खातों में रुपये अंतरित करने के लिए मजबूर किया. पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने पुत्तूर तालुका के निवासी किसान से कहा था कि उसके बैंक खातों का सत्यापन करने और उसके धन के वैध होने की पुष्टि के लिए रुपये अंतरित करना जरूरी है.

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार किसान ने आरोपियों के दावों पर विश्वास करते हुए इस अवधि के दौरान उनके बताए बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिये कुल 1,31,50,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए. पुलिस के मुताबिक ठगी का एहसास होने पर उसने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने बताया कि दक्षिण कन्नड़ साइबर अपराध थाने में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है.

साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि आमतौर पर किसान और ग्रामीण तकनीक से कम अवेयर होते हैं और इसका फायदा साइबर ठग उठाकर उन्हें टारगेट करते हैं. किसानों और ग्रामीणों को बचने के लिए अपने बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई और ओटीपी से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या कृषि विभाग का अधिकारी बनकर फोन करने वालों से सावधान रहें और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, खाद सब्सिडी या सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें.

एक्सपर्ट ने कहा है कि किसी अनजान ऐप को डाउनलोड करने या स्क्रीन शेयर करने से भी बचें. पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती. यदि किसी के साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें. साथ ही, अपने बैंक को तुरंत सूचित करके खाते या यूपीआई सेवाओं को ब्लॉक करवाएं और लेनदेन का मैसेज, स्क्रीनशॉट तथा अन्य सबूत सुरक्षित रखें, ताकि समय रहते कार्रवाई करके नुकसान कम किया जा सके.

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