एग्रीवेट: राजस्थान के सायोबीन किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव मिलने से परेशान हैं. भारतीय किसान संघ ने कहा कि एमएसपी तय होने के बावजूद लगभग 1700 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव किसानों को दिया जा रहा है. इसके लिए सरकार कब एक्शन लेगी. किसान संघ ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चिट्ठी भेजकर मांग की है कि किसानों की उपज को तय कीमत पर खरीद पुक्की कराई जाए. आरोप है कि राज्य में अब तक खरीफ फसलों की खरीद शुरू नहीं की गई है.
भारतीय किसान संघ ने राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा को भेजी चिट्ठी में लिखा है कि प्रदेश के बड़े हिस्से में अकाल, कम बारिश और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते फसलों के नष्ट होने और उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. जहां अगेती बुवाई की गई थी और सिंचाई के स्रोत थे वहां के किसान पहले ही कम उत्पादन के कारण नुकसान में हैं. अब मंडियों में फसल की आवक शुरू हो गई है और बाजार भाव एमएसपी से नीचे होने के चलते किसान अपनी बची हुई फसल भी कम भाव पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं.
किसान संघ ने कहा कि वर्तमान में सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5708 रुपये प्रति क्विटंल है. लेकिन, प्रमुख सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र बारां-झालावाड़ में भाव लगभग 4000 रुपये प्रति किंवटल है, जिससे करीब 1700 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान किसानों को हो रहा है. मूंग का एमएसपी 8780 रुपये के मुकाबले जोधपुर-नागौर क्षेत्र में बाजार भाव लगभग 7200 रुपये प्रति क्विंटल है, यानी करीब 1500 रुपये प्रति किंवटल का नुकसान हो रहा है.
मूंगफली का एमएसपी 7517 रुपये है, जबकि फलौदी बीकानेर में इसके भाव लगभग 6600 प्रति क्विंटल है. इसमें भी करीब 900 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है. उड़द का एमएसपी 8200 है, इसके मुकाबले प्रदेश में उड़द के बाजार 5000 रुपये प्रति क्विंटल है, जिससे 3000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा का नुकसान है. धान सामान्य का एमएसपी 2441 रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि हनुमानगढ़ में लगभग 2200 रुपये प्रति क्विंटल है यानी करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा का अंतर है. बाजरा का एमएसपी 2900 क्विंटल है लेकिन अलवर और जयपुर में 2200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है.
भारतीय किसान संघ ने सीएम को भेजी चिट्ठी.
किसान संघ ने कहा कि यह केवल बाजार भाव का नुकसान है. अकाल के कारण प्रति बीघा उत्पादन में हुई कमी का नुकसान अलग से है. इसलिए किसानों को दोहरी आर्थिक मार से बचाने के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप जरूरी है. इसलिए समर्थन मूल्य पर सोयाबीन, मूंग, मूंगफली, उड़द, कपास तथा धान और बाजरा की घोषित एमएसपी पर तत्काल खरीद शुरू की जाए. समर्थन मूल्य से कम पर बिक्री पर रोक लगाई जाए. इसका साथ ही किसानों के पंजीयन, गिरदावरी एवं गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो तथा तकनीकी या कागजी प्रक्रिया के कारण कोई पात्र किसान खरीद से वंचित न हो.