एग्रीवेट: Potato Farming Bengal: इस बार आलू की बंपर पैदावार पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए परेशानी बन गई है. खेतों में फसल तो खूब हुई, लेकिन बाजार में सही कीमत नहीं मिलने से किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि, कई किसान अब दोबारा आलू लगाने से भी कतरा रहे हैं. देश के दूसरे सबसे बड़े आलू उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल में अगेती आलू की बुवाई घटने लगी है.
खासकर पुखराज जैसी जल्दी तैयार होने वाली किस्मों की खेती पर असर पड़ा है. आलू कारोबारियों का कहना है कि, अगर अगले एक महीने में कीमतें नहीं सुधरीं, तो 2026-27 के सीजन में आलू की खेती का कुल रकबा भी घट सकता है.
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पश्चिम बंगाल में इस समय ज्योति किस्म के आलू का भाव कोल्ड स्टोरेज के गेट पर करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल है. यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 100 रुपये कम है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य पतित पाबन दे ने बताया कि, इस कीमत में से किसानों के हाथ में केवल 150 से 170 रुपये प्रति क्विंटल ही बच रहे हैं. बाकी रकम भंडारण और दूसरे खर्चों में चली जा रही है. वहीं, कोलकाता के थोक बाजार में ज्योति आलू 11 से 12 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि पिछले साल इसकी कीमत करीब 15 रुपये किलो थी.
कम कीमतों का असर अब अगली फसल की तैयारियों पर भी दिखाई देने लगा है. रिपोर्ट में पश्चिम बंग प्रगतिशील आलू व्यवसायी समिति के सचिव लालू मुखर्जी के मुताबिक, किसानों को इस साल इतना नुकसान हुआ है कि कई किसान अगेती आलू की बुवाई शुरू करने की स्थिति में नहीं हैं. खासकर पुखराज जैसी जल्दी तैयार होने वाली किस्मों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले घट गई है. बीज की मांग भी कमजोर पड़ रही है. पिछले सीजन में पश्चिम बंगाल में करीब 5 लाख हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी. कीमतें नहीं सुधरीं तो इस बार रकबा घट सकता है.
पश्चिम बंगाल में 2025-26 के दौरान करीब 140 लाख टन आलू पैदा हुआ था. यह पिछले पांच वर्षों का सबसे ज्यादा उत्पादन बताया जा रहा है. फसल ज्यादा होने से कोल्ड स्टोरेज में भी रिकॉर्ड आलू पहुंचा. आमतौर पर राज्य में 70 से 72 लाख टन आलू रखा जाता था, लेकिन इस बार करीब 80 लाख टन आलू जमा हुआ. पतित पाबन दे के मुताबिक, अभी भी कोल्ड स्टोरेज की कुल क्षमता का करीब 37 से 38 फीसदी हिस्सा आलू से भरा हुआ है. इतनी ज्यादा बची हुई फसल के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
आलू कारोबारियों ने सरकार से मांग की है कि, दूसरे राज्यों में ट्रकों से आलू भेजने पर भी सब्सिडी दी जाए. सितंबर में राज्य सरकार ने रेलवे के जरिए दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता देने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि थी. अब कारोबारी चाहते हैं कि, यही सुविधा सड़क के रास्ते आलू भेजने पर भी मिले. उनका मानना है कि इससे दूसरे राज्यों में आलू पहुंचाना आसान होगा और स्थानीय बाजार में जमा स्टॉक कम करने में मदद मिलेगी.
पश्चिम बंगाल पहले हर साल करीब 20 से 25 लाख टन अतिरिक्त आलू ओडिशा, बिहार, झारखंड और असम जैसे राज्यों में भेजता था. लेकिन 2024 में दूसरे राज्यों को आलू भेजने पर लगी अस्थायी रोक के बाद व्यापार पर असर पड़ा. इस दौरान कुछ बाजारों में उत्तर प्रदेश के आलू की पहुंच बढ़ गई.
हालांकि, बाद में रोक हटा ली गई थी. अब कारोबारियों की कोशिश है कि दूसरे राज्यों में आलू की बिक्री फिर बढ़े, ताकि किसानों को बेहतर कीमत मिल सके और अगली बुवाई से पहले उनका नुकसान कुछ कम हो सके.