एग्रीवेट: Ladakh Orgc Farming: देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में लद्दाख से बड़ी खबर सामने आई है. पहाड़ों और कठिन मौसम के बीच खेती करने वाला लद्दाख अब देश का पहला पूरी तरह जैविक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया है. यहां खेती में रासायनिक खादों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को इसकी जानकारी दी.
इस पहल का मकसद खेती में रसायनों का इस्तेमाल कम करना, हिमालय के पर्यावरण को सुरक्षित रखना और किसानों को प्राकृतिक तरीकों से खेती करने के लिए बढ़ावा देना है. हालांकि, किसानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि, जैविक खेती से तैयार उनकी फसल को बाजार में बेहतर कीमत कैसे मिलेगी.
लद्दाख प्रशासन ने इस साल जून में रासायनिक खादों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. इसके बाद किसानों को जैविक तरीके से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. जैविक खेती में रासायनिक खादों की जगह गोबर की सड़ी हुई खाद, कम्पोस्ट और दूसरी प्राकृतिक खादों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे मिट्टी की सेहत बेहतर बनाने और खेती में रसायनों पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है. लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाके में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए भी इस पहल को अहम माना जा रहा है.
लद्दाख में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए साल 2020 में मिशन ऑर्गेनिक डेवलपमेंट इनिशिएटिव यानी MODI योजना शुरू की गई थी. इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इसका लक्ष्य लद्दाख के सभी 666 गांवों को जैविक खेती के लिए प्रमाणित करना है. सरकार के मुताबिक, इस घोषणा से पहले 207 राजस्व गांवों को जैविक खेती का सर्टिफिकेट मिल चुका था.
योजना के तहत किसानों को जैविक खाद तैयार करने, बीज उपलब्ध कराने और फसलों को खराब मौसम से बचाकर उगाने के लिए मदद दी जाती है. इसके अलावा जैविक उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए भी सहायता देने का प्रावधान है.
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी दी. उन्होंने इसका श्रेय लद्दाख के किसानों की मेहनत और लगन को दिया. उनके मुताबिक, यह कदम रसायन-मुक्त खेती और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में अहम है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे किसानों के उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी.
जैविक खेती से किसानों को लंबे समय में मिट्टी की सेहत सुधारने और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. अगर लद्दाख के जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार और अच्छी कीमत मिलती है, तो किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना भी है. हालांकि, इसके लिए फसलों की सही पैकिंग, भंडारण और दूसरे राज्यों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी. लद्दाख की इस पहल से दूसरे पहाड़ी इलाकों में भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के नए रास्ते खुल सकते हैं.