एग्रीवेट: देश में बासमती धान की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले करीब 53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अभी इसकी कीमत 42 से 45 रुपये प्रति किलो है, जबकि 2025 में यह करीब 28 रुपये प्रति किलो बिक रहा था. बासमती की शुरुआती किस्मों, जैसे पूसा 1509, की मंडियों में आवक शुरू होने के साथ ही कीमतों में तेजी देखी जा रही है. इससे किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बासमती के दाम बढ़ने की मुख्य वजह घरेलू बाजार नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मांग में बढ़ोतरी है. खासकर खाड़ी देशों में इसकी मांग बढ़ रही है.
पंजाब के पूर्व डिप्टी कमिश्नर और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू ने द प्रिंट से बातचीत में कहा कि मध्य पूर्व और खाड़ी देशों में बासमती चावल का भंडारण बढ़ाया जा रहा है. उनके मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की स्थिति के कारण इन देशों में चावल की मांग बढ़ सकती है. खाड़ी देशों में बासमती की मांग बढ़ने से भारतीय चावल के निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है. इसका असर बाजार में कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है.
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है. देश हर साल 2 करोड़ टन से ज्यादा चावल विदेश भेजता है. इसमें करीब 60 लाख टन बासमती चावल होता है. भारत के कुल बासमती निर्यात का आधे से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों में जाता है. इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), यमन और ईरान प्रमुख हैं. दुनिया में बासमती चावल की कुल मांग का करीब 70 से 80 फीसदी हिस्सा भारत पूरा करता है. वहीं, पाकिस्तान बासमती का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है और बाकी मांग का बड़ा हिस्सा पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने से भारतीय बासमती चावल की कीमतों को सहारा मिल रहा है.
भारत में बासमती चावल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय नहीं है. ऐसे में हर साल इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है. पिछले साल बासमती की ज्यादातर किस्में 24 से 28 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकी थीं. इस बार कीमतों में आई तेजी को पंजाब और हरियाणा के किसान मांग और आपूर्ति में बदलाव का असर मान रहे हैं. हरियाणा के उचाना के किसान अनिल बेनीवाल ने द प्रिंट को बताया कि फसल की कटाई के आखिरी दौर में बेमौसम ओलावृष्टि और बारिश से इस साल बासमती का उत्पादन थोड़ा प्रभावित हुआ है. इससे भी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.
बेनीवाल ने अपने चार एकड़ खेत में बासमती की 1121 किस्म उगाई है. मौजूदा बाजार भाव को देखते हुए उन्हें अपनी उपज 45 से 50 रुपये प्रति किलो तक बिकने की उम्मीद है. यह पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर भाव है. हालांकि, उनका कहना है कि इससे होने वाली कमाई बचत बढ़ाने के बजाय खेती की लागत निकालने में ही मदद करेगी.
अनिल बेनीवाल का कहना है कि बासमती चावल को इस बार अच्छा भाव मिल रहा है, लेकिन इसकी खेती करना महंगा भी है. सामान्य धान के मुकाबले बासमती की फसल में कम पानी की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए अच्छी गुणवत्ता वाला पानी जरूरी है. बेनीवाल के मुताबिक, अगर ट्यूबवेल के पानी में खारापन या कठोरता ज्यादा है, तो बासमती की खेती करना मुश्किल हो जाता है.