एग्रीवेट: 30 अक्टूबर 2026, भोपाल: रबी 2026-27 की तैयारी: किसानों को घर बैठे मिलेगा खाद का टोकन, नकली खाद-बीज बेचने वालों पर होगी प्राथमिकी (एफआईआर) – मध्य प्रदेश में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को लेकर कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता ने अधिकारियों को किसानों की जरूरत के अनुसार खाद, बीज और अन्य कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों को खाद प्राप्त करने में परेशानी न हो, इसके लिए वितरण व्यवस्था को आसान बनाया जाए। किसान घर बैठे व्हाट्सएप के माध्यम से खाद के लिए टोकन जनरेट कर सकेंगे। इसके अलावा पंचायत स्तर पर सुविधा केंद्र भी बनाए गए हैं। वहीं, नकली और अमानक खाद, बीज एवं कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में लाइसेंस निरस्त करने के साथ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता की अध्यक्षता में भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के लिए खरीफ 2026 की समीक्षा और रबी 2026-27 की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित की गई। शनिवार को भोपाल में अपेक्स बैंक के सभागार में हुई इस बैठक में दोनों संभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
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बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए खाद वितरण व्यवस्था को सुगम बनाया है। किसान व्हाट्सएप के माध्यम से घर बैठे खाद के लिए टोकन जनरेट कर सकते हैं। पंचायत स्तर पर फैसिलिटेशन सेंटर भी बनाए गए हैं। प्रत्येक किसान को उसकी फसल और जरूरत के अनुसार पर्याप्त खाद उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को खाद वितरण की माइक्रो प्लानिंग करने और इस बात का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए कि किसानों को खाद लेने के लिए दूर न जाना पड़े। कृषि, सहकारिता और अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय से काम करें, ताकि किसानों को समय पर कृषि आदान मिल सकें।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने नकली और अमानक खाद, बीज एवं कीटनाशकों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल लाइसेंस निरस्त करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाए। कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और उप संचालक कृषि को ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना और उन्हें नकली उत्पादों से होने वाले नुकसान से बचाना है।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने किसानों को फसलों की जल्दी बुवाई के लिए प्रेरित करने को कहा, ताकि वे मिट्टी में वर्तमान में उपलब्ध नमी का लाभ उठा सकें। किसानों को फसल विविधीकरण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्रमाणित बीजों और आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत बरबड़े ने बताया कि इस वर्ष अलनीनो की आशंका को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इनमें गेहूं, अलसी, सरसों, मसूर और मटर जैसी फसलें शामिल हैं। जिन जिलों में प्रेशराइज्ड सिंचाई प्रणाली उपलब्ध है, वहां किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
फसल कटाई के बाद नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए भी अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि किसानों को नरवाई जलाने के नुकसान के बारे में समझाया जाए और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) लगा होना चाहिए। इस प्रणाली की मदद से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने और उन्हें मिट्टी में मिलाने में सहायता मिलती है। इसके अलावा किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए बीमा कंपनियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय करने पर भी जोर दिया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त ने मंडियों को आधुनिक और किसानों के लिए बेहतर सुविधाओं से युक्त बनाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि देश में उद्यानिकी फसलों का रकबा कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 16.5 प्रतिशत है, जबकि मध्य प्रदेश में यह करीब 9.5 प्रतिशत है। इस अंतर को कम करने के लिए उद्यानिकी क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कृषि उत्पादन आयुक्त ने प्रत्येक जिले में कम से कम एक हजार एकड़ क्षेत्र में उद्यानिकी क्लस्टर विकसित करने का सुझाव दिया। इन क्लस्टरों में जिले की विशिष्ट उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे संबंधित फसलों की पहचान मजबूत होने के साथ किसानों को उत्पादन और विपणन के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के तहत नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) पर मत्स्य पालकों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पंजीकृत प्रत्येक मत्स्य पालक को 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे प्रदान की जा रही है।
अधिकारियों को स्मार्ट फिश पार्लर, फिश लैंडिंग सेंटर और आधुनिक मत्स्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के निर्माण में तेजी लाने के लिए भी कहा गया। मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) उपलब्ध कराने और विभागीय जल क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने पर भी जोर दिया गया।
इसके अतिरिक्त गौशालाओं की निगरानी, सहायता राशि का समय पर वितरण, पशु चारा उत्पादन और परिवहन की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत प्रत्येक ब्लॉक में साइलेज निर्माण को बढ़ावा देने, पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने और चलित पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से घर तक सेवाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में अधिकारियों को सभी योजनाओं का मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और उनकी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों को योजनाओं का लाभ मिल सके।