एग्रीवेट: 24 सितंबर 2026, भोपाल: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत, कृषि कर्ज की ब्याज दर 11% से घटकर 6% हुई; मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना शुरू – उत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कृषि ऋण अब पहले के मुकाबले कम ब्याज दर पर उपलब्ध होगा। राज्य में मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक (एलडीबी) से मिलने वाले ऋण पर ब्याज दर 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। योजना के माध्यम से आने वाले वर्षों में करीब 5 लाख लघु और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना का शुभारंभ केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। योजना का उद्देश्य किसानों को खेती और कृषि मशीनरी से जुड़े कामों के लिए लंबे समय के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि पूंजी की कमी के कारण कृषि कार्य प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना के शुभारंभ के दौरान कहा कि किसानों को खेती-किसानी और कृषि मशीनरी के लिए पूंजी की जरूरत पड़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक ऋण की व्यवस्था की गई है। अब किसान सहकारी ग्राम्य विकास बैंक के माध्यम से 6 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज ले सकेंगे।
उन्होंने कहा कि किसान की आर्थिक स्थिति बेहतर होने का असर व्यापक रूप से पड़ता है। मुख्यमंत्री ने सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक सहकारी संस्थाओं के जरिए किसानों तक ऋण के साथ खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सुविधाएं पहुंचाना आसान हो सकता है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद प्रदेश में की गई किसान कर्जमाफी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 86 लाख लघु और सीमांत किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऋण माफ किए गए। उन्होंने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का जिक्र करते हुए सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, अर्जुन सहायक, बाणसागर और मध्य गंगा जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले करीब साढ़े नौ वर्षों में 24 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है।
इसके अलावा 16 लाख से अधिक निजी ट्यूबवेल वाले किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की बात कही गई। नहरों और सरकारी ट्यूबवेल से मिलने वाली सिंचाई सुविधा भी मुफ्त होने की जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चीनी उद्योग और गन्ना किसानों को किए गए भुगतान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में 122 चीनी मिलें संचालित हैं और इनमें 100 से अधिक मिलों द्वारा किसानों को गन्ने का भुगतान चौथे दिन किया जा रहा है। उनके अनुसार, पिछले नौ वर्षों में गन्ना किसानों को कुल 3.30 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। उन्होंने पिछली सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय 29 चीनी मिलें बंद की गई थीं और इनमें से 21 मिलों को कम कीमत पर बेच दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को खेती में बीज से लेकर बाजार तक जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग स्तर पर काम किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में पैक हाउस और फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई हैं। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन को बढ़ावा देने के साथ कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। सहकारिता क्षेत्र के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले वेयरहाउस तैयार किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने सहकारी क्षेत्र की स्थिति में सुधार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के 16 सहकारी बैंक निष्क्रिय हो गए थे और उनके लाइसेंस जब्त किए जा चुके थे। अब इनमें से 15 बैंक मुनाफे में आ गए हैं, जबकि एक अन्य बैंक की स्थिति सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को मिलने वाली ब्याज मुक्त कैश क्रेडिट सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया गया है। प्रदेश में सहकारिता से 54 लाख नए सदस्य भी जुड़े हैं। किसानों तक खाद, कीटनाशक और अन्य सुविधाएं समय पर पहुंचाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि पोर्टल और यूपीसीडीसी ऐप लॉन्च किया। खाद से जुड़ी सेवाओं के लिए मोबाइल ऐप के साथ सहकारी सेवाओं को सुगम बनाने के उद्देश्य से कोऑपरेटिव डाटा सेंटर और मोबाइल ऐप की भी शुरुआत की गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पांच सारथियों को भारत टैक्सी के शेयर प्रमाण पत्र सौंपे। वहीं मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के पांच लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए गए।