कम बारिश के बावजूद गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीद, सरकार ने रखा 12.1 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Wheat Production: इस साल मॉनसून में कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है. खासकर उन इलाकों में जहां खेतों में नमी कम है और सिंचाई के लिए पानी की जरूरत पड़ रही है. लेकिन इस बीच गेहूं की खेती को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. कम बारिश के बावजूद रबी सीजन 2026-27 में गेहूं की बुवाई पिछले साल के आसपास रहने की उम्मीद है. सरकार ने इस बार गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 12.1 करोड़ टन रखा है. अगर मौसम ने साथ दिया और किसानों को समय पर पानी मिलता रहा, तो देश में एक बार फिर गेहूं की बंपर पैदावार हो सकती है.

कृषि मंत्रालय ने रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 12.1 करोड़ टन तय किया है. पिछले साल देश में रिकॉर्ड 12.07 करोड़ टन गेहूं पैदा हुआ था. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में करीब 3.36 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की खेती हुई थी. इस बार भी बुवाई का रकबा लगभग इतना ही रहने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, अभी गेहूं की बुवाई चल रही है. इसलिए असली तस्वीर आने वाले दिनों में साफ होगी.

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट का कहना है कि, गेहूं पैदा करने वाले प्रमुख राज्यों में सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हैं. पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती होती है. इन इलाकों में नहरों, ट्यूबवेल और दूसरी सिंचाई सुविधाओं की मदद से किसान फसल को पानी दे सकते हैं. यही वजह है कि कम बारिश के बावजूद गेहूं की बुवाई पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ने की उम्मीद है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई. उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी 6 फीसदी और मध्य भारत में 3 फीसदी रही. वहीं, अक्टूबर के शुरुआती 14 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में 13.1 मिलीमीटर के मुकाबले 12 मिलीमीटर बारिश हुई.

सबसे ज्यादा चिंता मध्य भारत को लेकर है. यहां अक्टूबर के पहले 14 दिनों में सामान्य 37.3 मिलीमीटर के मुकाबले सिर्फ 1.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. हालांकि, अक्टूबर में हुई बारिश से उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में खेतों की नमी बढ़ी है. इससे गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों को मदद मिल सकती है.

देश में गेहूं की उपलब्धता को लेकर भी स्थिति फिलहाल बेहतर बताई जा रही है. 16 सितंबर को सरकारी भंडार में करीब 4.74 करोड़ टन गेहूं मौजूद था. जबकि तय जरूरत के हिसाब से करीब 2.76 करोड़ टन गेहूं का भंडार जरूरी था. यानी सरकार के पास जरूरत से ज्यादा गेहूं मौजूद है. इस स्टॉक का इस्तेमाल राशन योजनाओं और दूसरी सरकारी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, ज्यादा स्टॉक होने का मतलब यह नहीं है कि बाजार में गेहूं या आटे की कीमत तुरंत कम हो जाएगी.

सरकार ने गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है. यह कीमत 2027-28 के बिक्री सीजन के लिए तय की गई है. इससे पहले गेहूं की एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल थी. यानी किसानों को प्रति क्विंटल 25 रुपये ज्यादा मिलेंगे.

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