एग्रीवेट: मखाना की खेती किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया बन सकती है. इसकी बाजार में मांग होने के कारण किसान पारंपरिक फसलों के साथ मखाना की खेती में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. हालांकि, बेहतर उत्पादन के लिए सही समय पर नर्सरी तैयार करना, खेत में पर्याप्त पानी रखना और पौधों की उचित तरीके से रोपाई करना जरूरी है. डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार, मखाना की खेती मुख्य रूप से दो तरीकों से की जाती है, जिनमें खेत विधि काफी प्रचलित है. इस विधि में पहले नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें मुख्य खेत में लगाया जाता है.
मखाना की खेती में खेत विधि का काफी इस्तेमाल किया जाता है. इसकी प्रक्रिया काफी हद तक धान की खेती से मिलती-जुलती है. इसमें किसान पहले नर्सरी में बीज बोकर पौधे तैयार करते हैं और बाद में उनकी मुख्य खेत में रोपाई करते हैं. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, मखाना की खेती सीधे बीज छिड़ककर भी की जा सकती है, लेकिन खेत विधि में पौधों को व्यवस्थित तरीके से लगाने की सुविधा मिलती है. इससे किसानों को फसल की देखभाल और पानी का प्रबंधन करने में आसानी हो सकती है. हालांकि, बेहतर उत्पादन के लिए खेत की स्थिति और उचित प्रबंधन जरूरी है.
मखाना की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार करनी होती है. इसके लिए नवंबर से दिसंबर और जनवरी के अंतिम सप्ताह तक का समय उपयुक्त माना जाता है. किसान लगभग 500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नर्सरी तैयार कर सकते हैं. इतनी नर्सरी से करीब एक हेक्टेयर यानी लगभग ढाई एकड़ खेत में रोपाई के लिए पर्याप्त पौधे मिल सकते हैं. नर्सरी में मखाना के बीज बोए जाते हैं. इसके बाद उचित पानी और देखभाल मिलने पर पौधे विकसित होने लगते हैं. किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि रोपाई के लिए स्वस्थ और अच्छी तरह विकसित पौधों का ही चुनाव करें.
मखाना एक जलीय फसल है, इसलिए इसकी खेती में पानी का विशेष महत्व होता है. नर्सरी से लेकर मुख्य खेत तक जल प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, खेत विधि से मखाना की खेती में सामान्य तौर पर डेढ़ से दो फीट पानी की गहराई बनाए रखना उपयोगी माना जाता है. पानी की कमी होने से पौधों का विकास प्रभावित हो सकता है. किसानों को खेत की मेड़बंदी अच्छी तरह करनी चाहिए, ताकि पानी बाहर न निकले. इसके अलावा पानी की उपलब्धता और खेत की स्थिति के अनुसार सिंचाई का प्रबंधन करना जरूरी है.
नर्सरी में पौधे तैयार होने के बाद मार्च तक उनकी मुख्य खेत में रोपाई की जा सकती है. इसके लिए पौधों को सावधानी से निकालकर पानी भरे खेत में लगाया जाता है. मखाना की रोपाई धान की तरह की जाती है. किसान खेत में उचित दूरी पर पौधों को कतारों में लगा सकते हैं. रोपाई के दौरान पौधों की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, मखाना की खेती में सही समय पर नर्सरी तैयार करना, स्वस्थ पौधों का चुनाव और पर्याप्त पानी बनाए रखना बेहद जरूरी है. किसानों को फसल की नियमित निगरानी भी करनी चाहिए.