एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है. खड़ी खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. वहीं, खेतों में पानी भरने से अब रबी फसलों की बुवाई में भी देरी की आशंका है. पानी निकलने के बाद ही खेत दोबारा खेती के लिए तैयार हो पाएंगे. वहीं, तेज हवाओं के कारण कई खेतों मे तैयार फसलें जमीन पर गिर गई हैं. इससे धान के दाने खराब होने, फसल सड़ने और दाने अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है. इससे किसानों को फसल के नुकसान के साथ उत्पादन में कमी की भी चिंता है. किसानों का कहना है कि बारिश से धान की फसल को 70 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में कुल खेती के 60 फीसदी से ज्यादा हिस्से में धान की खेती होती है. साल 2025 में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य रहा था. राज्य ने 209.31 लाख टन चावल का उत्पादन किया था, जो देश के कुल उत्पादन का 14.04 फीसदी था. इस साल कटाई के समय हुई ज्यादा बारिश से धान की पैदावार और कुल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. पूर्व कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि यूपी की मुख्य खरीफ फसल होने के कारण धान पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है. कई जगह कटाई के लिए तैयार धान खेतों में गिर गया है. वहीं, लंबे समय तक पानी में रहने से खड़ी फसल के सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है.
उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से धान के अलावा दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की फसलें भी प्रभावित हुई हैं. बुंदेलखंड में बड़े पैमाने पर बोई जाने वाली बाजरा की फसल को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है. ये फसलें धान के मुकाबले कम पानी में तैयार होती हैं, इसलिए खेतों में लंबे समय तक पानी भरने से इन पर ज्यादा असर पड़ सकता है. पूर्व कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि अब सबसे बड़ी चिंता रबी सीजन की बुवाई को लेकर है. खेतों में पानी भरा होने के कारण उनके जल्दी सूखने की संभावना कम है. ऐसे में गेहूं समेत रबी फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है.
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के लखनऊ जिलाध्यक्ष आलोक वर्मा के मुताबिक, लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर और अमेठी समेत कई जिलों में धान की फसल को 70 फीसदी तक नुकसान हो सकता है. खेतों में लंबे समय तक पानी भरने और फसल गिरने से धान के अधपके दाने सड़ने का खतरा बढ़ गया है. वहीं, गाजीपुर में पकी हुई धान और बाजरा की फसलें खेतों में गिर गई हैं. इससे किसानों के लिए फसल की कटाई मुश्किल हो गई है और फसल खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है.
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर समेत कई जिलों में निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया है. इससे खड़ी फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंचने, फसल का रंग बदलने और उसके खराब होने का खतरा बढ़ गया है. खेतों में फसल अवशेष डूबने से किसानों को सूखा चारा जुटाने में भी परेशानी हो रही है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में शुक्रवार रात से लगातार बारिश हो रही है. इससे खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है.
वहीं, भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने सरकार से तुरंत विशेष फसल नुकसान सर्वे कराने की मांग की है. संगठन का कहना है कि मुआवजे का आधार गांव या किसी पूरे इलाके को नहीं, बल्कि हर किसान के खेत और वास्तविक नुकसान को बनाया जाना चाहिए. BKU ने मांग की है कि किसानों के खेतों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए और जितना नुकसान हुआ है, उसी के आधार पर मुआवजा दिया जाए. BKU के लखनऊ जिलाध्यक्ष आलोक वर्मा ने कहा कि फसल बीमा के दावों का जल्द निपटारा किया जाए. जिन किसानों की फसल पूरी तरह या बड़े स्तर पर बर्बाद हुई है, उन्हें विशेष राहत दी जाए और मुआवजे की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाए.