तेल खली के निर्यात पर लगा ब्रेक, जुलाई में 65 फीसदी गिरावट.. सोयाबीन मील की मांग हुई कम – एग्रीवेट

Team Agrivate
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तेल खली के निर्यात पर लगा ब्रेक, जुलाई में 65 फीसदी गिरावट.. सोयाबीन मील की मांग हुई कम - एग्रीवेट - तेल खली निर्यात

एग्रीवेट: भारत से जुलाई 2026 में तेल खली (ऑयलमील) का निर्यात सालाना आधार पर 65 फीसदी घटकर 1.48 लाख टन रह गया. जुलाई 2025 में देश से 4.22 लाख टन तेल खली का निर्यात हुआ था. सस्ता सोयाबीन मील, दक्षिण अमेरिकी देशों से कम कीमत पर मिलने वाली आपूर्ति और माल ढुलाई की बढ़ती लागत को निर्यात में गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता के मुताबिक, भारतीय सोयाबीन मील को अर्जेंटीना और ब्राजील से मिलने वाले सस्ते माल के कारण कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. इससे जुलाई 2026 में सोयाबीन मील का निर्यात सालाना आधार पर करीब 90 फीसदी गिर गया. आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में सोयाबीन मील का निर्यात घटकर 17,810 टन रह गया, जबकि जुलाई 2025 में यह 1,83,553 टन था.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, लाल सागर में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गईं. जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा, जिससे माल ढुलाई का खर्च और सामान पहुंचने में लगने वाला समय बढ़ गया. इसका असर खास तौर पर यूरोप और पश्चिम एशिया भेजे जाने वाले माल पर पड़ा. SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता के मुताबिक, जुलाई 2026 में भारतीय सोयाबीन मील की कीमत करीब 613 डॉलर प्रति टन थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 428 डॉलर प्रति टन थी. इस बड़े अंतर के कारण भारतीय सोयाबीन मील अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूसरे देशों के मुकाबले काफी महंगा पड़ रहा था. इससे इसकी मांग और निर्यात पर असर पड़ा.

उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार में सोयाबीन मील की ऊंची कीमतों और पोल्ट्री व पशु आहार बनाने वाली कंपनियों की मांग के कारण निर्यात के लिए इसकी उपलब्धता भी कम हो गई. ऐसे में निर्यातकों के लिए विदेशी बाजार में माल बेचना कम फायदेमंद रहा. सोयाबीन मील के अलावा सरसों खली के निर्यात में भी गिरावट दर्ज की गई. जुलाई 2026 में इसका निर्यात घटकर 96,539 टन रह गया, जबकि जुलाई 2025 में भारत ने 2,09,128 टन सरसों खली का निर्यात किया था.

भारत से वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान तेल खली का कुल निर्यात 27 फीसदी घट गया. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के मुताबिक, इस अवधि में कुल 11.05 लाख टन तेल खली का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 15.16 लाख टन था. SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने बताया कि निर्यात में गिरावट की मुख्य वजह सोयाबीन मील की कम खेप, दक्षिण अमेरिकी देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ना है.

हालांकि, चीन समेत अन्य बाजारों में सरसों खली के निर्यात में बढ़ोतरी से कुछ राहत मिली, लेकिन इससे कुल निर्यात में आई गिरावट की भरपाई नहीं हो सकी.अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान सरसों खली का निर्यात बढ़कर 7.56 लाख टन हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 7.40 लाख टन था. इसके उलट, सोयाबीन मील के निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. अप्रैल-जुलाई 2026-27 में इसका निर्यात घटकर 1.87 लाख टन रह गया, जबकि अप्रैल-जुलाई 2025-26 में भारत ने 6.76 लाख टन सोयाबीन मील का निर्यात किया था.

वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान चीन, बांग्लादेश और वियतनाम भारतीय तेल खली के प्रमुख खरीदार बनकर उभरे. इस अवधि में चीन ने भारत से 3.55 लाख टन तेल खली खरीदी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह मात्रा 2.83 लाख टन थी. चीन ने भारत से मुख्य रूप से सरसों खली खरीदी. इसमें 3.50 लाख टन सरसों खली के अलावा 1,616 टन अरंडी खली और 3,127 टन सोयाबीन मील शामिल था. वहीं, बांग्लादेश ने अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान भारत से 1.72 लाख टन तेल खली का आयात किया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह मात्रा 1.47 लाख टन थी.. बांग्लादेश ने 1.63 लाख टन सरसों खली, 8,204 टन सोयाबीन मील और 911 टन राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन खरीदा.

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