एग्रीवेट: बारिश कम होने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों के सामने रबी सीजन में फसलों की सिंचाई की चुनौती बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में खेती की आधुनिक तकनीकें किसानों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम और मल्चिंग अपनाकर किसान कम पानी में भी फसलों की जरूरत पूरी कर सकते हैं. इसके साथ ही कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का चयन करना भी जरूरी है.
कम पानी में खेती करने के लिए ड्रिप सिंचाई एक उपयोगी तकनीक है. इसमें पाइप और ड्रिपर की मदद से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. इससे खेत के उन हिस्सों में पानी फैलने से बचता है, जहां इसकी जरूरत नहीं होती. इस तकनीक का इस्तेमाल टमाटर, मिर्च और दूसरी सब्जियों के साथ अनार व अमरूद जैसी फलदार फसलों में भी किया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, ड्रिप सिस्टम लगाने से पहले किसान को फसल, खेत के आकार और पानी की उपलब्धता का आकलन करना चाहिए. एक से पांच बीघा में सब्जियों की खेती के लिए इसकी अनुमानित लागत 25 हजार से 60 हजार रुपये तक हो सकती है. हालांकि, वास्तविक खर्च उपकरणों की गुणवत्ता और खेत की जरूरत के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.
स्प्रिंकलर सिस्टम भी कम पानी में सिंचाई करने का एक अच्छा विकल्प है. इसमें पाइप और नोजल के जरिए पानी को फव्वारे की तरह खेत में छिड़का जाता है. इससे फसल को जरूरत के अनुसार पानी देना आसान हो सकता है. खासकर उन क्षेत्रों में यह तकनीक उपयोगी है, जहां सिंचाई के लिए पानी सीमित मात्रा में उपलब्ध है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, स्प्रिंकलर सिस्टम का चुनाव करते समय फसल की किस्म, खेत की बनावट और उपलब्ध पानी को ध्यान में रखना चाहिए. हवा की गति और मौसम का भी सिंचाई पर असर पड़ता है. इसलिए सही समय पर सिंचाई करने और उपकरणों का नियमित रखरखाव करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.
मल्चिंग तकनीक के जरिए मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है. इसमें पौधों के आसपास की जमीन को सूखे पत्तों, फसल अवशेषों या विशेष कृषि फिल्म से ढक दिया जाता है. इससे मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण कम हो सकता है और खरपतवार की बढ़वार पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सब्जियों और बागवानी फसलों में मल्चिंग का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है. किसान उपलब्ध संसाधनों और फसल की जरूरत के हिसाब से जैविक या प्लास्टिक मल्च का चुनाव कर सकते हैं. इससे सिंचाई की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है.
सिंचाई के पानी की कमी होने पर केवल तकनीक बदलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल का चुनाव भी महत्वपूर्ण है. बाजरा, ग्वार, मोठ और तिल जैसी फसलें कम पानी वाली परिस्थितियों के लिए उपयुक्त विकल्प हो सकती हैं. हालांकि, इनकी उपयुक्तता मिट्टी, स्थानीय जलवायु और बुवाई के समय पर निर्भर करती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को अपने क्षेत्र की जल उपलब्धता और मौसम को ध्यान में रखकर फसल की योजना बनानी चाहिए. जरूरत के मुताबिक सिंचाई, मिट्टी में नमी बनाए रखने के उपाय और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का चयन करके पानी की कमी के बावजूद खेती को बेहतर ढंग से जारी रखा जा सकता है.