एग्रीवेट: 02 नवंबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कपास आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट दो महीने और बढ़ाई – केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर लगने वाली सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) की छूट को दो महीने के लिए और आगे बढ़ा दिया है। वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को एक अधिसूचना जारी करते हुए इस छूट की नई समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तय की है।
यह छूट पहले 31 अक्टूबर 2026 को खत्म होने वाली थी। नई अधिसूचना 30 मई 2026 की मूल अधिसूचना में संशोधन करती है, जिसके तहत यह छूट शुरू में लागू की गई थी। यानी एक्सटेंशन ऐसे समय दिया गया जब पुरानी छूट की अवधि खत्म होने में सिर्फ एक दिन बाकी था।
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वस्त्र मंत्रालय के मुताबिक इस फैसले का मकसद घरेलू टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए कपास की स्थिर उपलब्धता बनाए रखना है। मंत्रालय का कहना है कि इससे खास किस्म के कपास की जरूरतें पूरी होंगी और कपड़ा-परिधान वैल्यू चेन में मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।
मंत्रालय के बयान के मुताबिक, शुल्क-मुक्त आयात से छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को कच्चा माल जुटाने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा और उनकी इनपुट लागत में कमी आएगी। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह भी कहा कि यह फैसला घरेलू कपास किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए “संतुलित” तरीके से लिया गया है, हालांकि यह संतुलन व्यवहार में कैसे काम करेगा, इसका कोई विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत का कपड़ा निर्यात बढ़ रहा है। अगस्त 2026 में टेक्सटाइल निर्यात सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत बढ़कर 29,776 करोड़ रुपये रहा। अप्रैल से अगस्त 2026 की संचयी अवधि में निर्यात 1.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो पिछले साल की इसी अवधि से 10.3 प्रतिशत ज्यादा है।
कपास आयात पर शुल्क छूट सीधे तौर पर किसानों के लिए कोई नई सब्सिडी या लाभ योजना नहीं है, बल्कि यह कपड़ा मिलों और निर्यातकों को सस्ता कच्चा माल मुहैया कराने वाला व्यापार-नीति फैसला है। इससे जुड़ी कस्टम अधिसूचना का औपचारिक नंबर अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने कपास आयात पर यह छूट बढ़ाई हो। मूल अधिसूचना 30 मई 2026 को जारी हुई थी, जिसके बाद से कपास का शुल्क-मुक्त आयात लगातार जारी है। अब तीसरी बार इसकी समय-सीमा आगे खिसकाई गई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार घरेलू कपास की उपलब्धता को लेकर अभी भी सतर्क बनी हुई है।
कपड़ा उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि देश में कई खास किस्म के कपास, जैसे एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कॉटन, की घरेलू पैदावार सीमित है और इनकी मांग बड़े पैमाने पर आयात से पूरी होती है। ऐसे में शुल्क-मुक्त आयात जारी रहने से मिलों को कच्चे माल की लगातार सप्लाई मिलती रहती है।
इसी तरह की छूट पहले लागू हुई थी, तब कुछ किसान संगठनों ने यह चिंता जताई थी कि शुल्क-मुक्त आयात बढ़ने से घरेलू बाजार में कपास की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि आयातित कपास सस्ता पड़ने लगता है। इस बार की अधिसूचना में सरकार ने इस आशंका का सीधा जवाब नहीं दिया है, सिर्फ यह कहा है कि यह फैसला किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित तरीके से लिया गया है।
कपास खरीफ सीजन की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र व तेलंगाना जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है। आने वाले दिनों में कपास की नई फसल मंडियों में पहुंचने के साथ यह देखना अहम होगा कि आयात शुल्क छूट का असर घरेलू कपास के भाव पर कितना पड़ता है।