प्रधानमंत्री-MKSSY: मछली पालन में नुकसान का जोखिम होगा कम, बीमा प्रीमियम पर सरकार दे रही ₹1 लाख तक की मदद – एग्रीवेट

Team Agrivate
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प्रधानमंत्री-MKSSY: मछली पालन में नुकसान का जोखिम होगा कम, बीमा प्रीमियम पर सरकार दे रही ₹1 लाख तक की मदद - एग्रीवेट - प्रधानमंत्री-MKSSY: मछली पालन

एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री-MKSSY: मछली पालन में नुकसान का जोखिम होगा कम, बीमा प्रीमियम पर सरकार दे रही ₹1 लाख तक की मदद – देश में जलीय कृषि क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्पादन में बढ़ोतरी, अधिक लोगों की भागीदारी और बाजार से बेहतर जुड़ाव के साथ इस क्षेत्र का विस्तार हुआ है। हालांकि, इसके साथ रोग, बाढ़, जलवायु संबंधी उतार-चढ़ाव, प्रदूषण, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम भी बढ़ा है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (प्रधानमंत्री-MKSSY) के तहत जलीय कृषि बीमा पहल शुरू की गई है। इसके तहत पात्र जलीय कृषि किसानों को बीमा प्रीमियम की लागत पर 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाता है। तालाब जलीय कृषि के लिए यह प्रोत्साहन अधिकतम ₹1 लाख तक है।

वर्ष 2024 में वैश्विक मत्स्य और जलीय कृषि उत्पादन 235 मिलियन टन तक पहुंच गया। इसमें जलीय जीवों की संख्या में 195 मिलियन टन की वृद्धि शामिल थी। इस क्षेत्र से प्रथम बिक्री स्तर पर अनुमानित 565 अरब अमेरिकी डॉलर का मूल्य सृजित हुआ, जबकि जलीय उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार 186 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वैश्विक जलीय खाद्य प्रणालियों में जलीय कृषि लगातार विकास का प्रमुख आधार बनी हुई है। वहीं, प्राकृतिक मत्स्य उत्पादन लगभग 92 मिलियन टन पर स्थिर रहा। अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन भी रिकॉर्ड 12.3 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो खाद्य सुरक्षा और आजीविका के लिए इसके बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

वैश्विक स्तर पर जलीय कृषि क्षेत्र में भारत का योगदान महत्वपूर्ण है। वर्ष 2024-25 में भारत का वार्षिक मछली उत्पादन रिकॉर्ड 19.8 मिलियन टन तक पहुंच गया। इससे भारत लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है। मीठे पानी में कार्प मछलियों का तालाब पालन, खारे पानी में झींगा एवं प्रॉन पालन, केज कल्चर तथा ठंडे पानी और समुद्री प्रजातियों की बढ़ती विविधता का भारत के कुल मछली उत्पादन में लगभग 74 प्रतिशत से अधिक का योगदान है। भारत का कुल मछली उत्पादन वर्ष 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 19.8 मिलियन टन हो गया। इसी अवधि में अंतर्देशीय मछली उत्पादन 6.1 मिलियन टन से बढ़कर 14.74 मिलियन टन हो गया।

भारत विश्व के प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यातकों में शामिल है। अकेले फ्रोजन झींगा से कुल समुद्री खाद्य निर्यात आय का लगभग 66 प्रतिशत प्राप्त होता है। भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात वर्ष 2013-14 के 5.08 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। वर्ष 2025-26 में भारत ने दुनिया के विभिन्न बाजारों में 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात किया।

मत्स्य क्षेत्र 3 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। इनमें मछुआरे, जलीय किसान, व्यापारी, प्रसंस्करणकर्ता और परिवहन से जुड़े लोग शामिल हैं। इनमें से अधिकांश तटीय, जनजातीय और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों से हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़ी आर्थिक चुनौतियों के बीच मत्स्य क्षेत्र, विशेष रूप से जलीय कृषि उत्पादन के माध्यम से, ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उभर रहा है।

भारत के पास जलीय कृषि के लिए व्यापक संसाधन उपलब्ध हैं। देश में 1.95 लाख किलोमीटर लंबी नदियां और नहरें, 31.5 लाख हेक्टेयर जलाशय, 22.1 लाख हेक्टेयर तालाब एवं टैंक और 14.1 लाख हेक्टेयर खारा जल क्षेत्र उपलब्ध है। इनमें से केवल लगभग 17 प्रतिशत क्षेत्र ही जलीय कृषि के लिए विकसित किया गया है। वर्ष 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से वर्ष 2024-25 में 19.8 मिलियन टन तक मछली उत्पादन में 106 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वहीं, औसत जलीय कृषि उत्पादकता बढ़कर 4.77 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। पीएमएमएसवाई के तहत सरकार ने 5 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादकता का लक्ष्य निर्धारित किया है।

जलीय कृषि का विस्तार नए फार्मों के माध्यम से क्षैतिज रूप से और मौजूदा फार्मों में उत्पादन की तीव्रता बढ़ाकर ऊर्ध्वाधर रूप से हो रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र विभिन्न जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहा है। रोगों का प्रकोप, गर्मियों में होने वाली ऐसी मत्स्य क्षति जिसे रोका नहीं जा सकता, प्रदूषण, भूकंप, चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाएं ऐसे जोखिम हैं, जो किसानों के निवेश को प्रभावित कर सकते हैं। इन जोखिमों का छोटे और सीमांत किसानों पर गंभीर वित्तीय प्रभाव पड़ता है। अधिकांश किसान सीमित लाभ मार्जिन पर काम करते हैं और ऊंची ब्याज दरों पर अनौपचारिक ऋण पर निर्भर रहते हैं। एक फसल चक्र विफल होने से किसान को तत्काल आर्थिक नुकसान के साथ ऋण-जाल में फंसने का खतरा भी रहता है। ऐसे नुकसान क्षेत्र में निवेश और उत्पादन विस्तार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

इन्हीं जोखिमों को देखते हुए भारत सरकार ने 8 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (प्रधानमंत्री-MKSSY) को मंजूरी दी। इस उप-योजना के घटक 1-बी के तहत जलीय कृषि बीमा को अपनाने के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत लाभ राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) के माध्यम से प्रदान किए जाते हैं। इससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए सीधे लाभ पहुंचाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री-MKSSY के तहत जलीय कृषि किसानों को एक फसल चक्र के लिए जलीय कृषि बीमा पॉलिसी खरीदने पर DBT के माध्यम से एकमुश्त मौद्रिक प्रोत्साहन दिया जाता है। पात्र लाभार्थियों को बीमा प्रीमियम की लागत का 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिलता है। तालाब जलीय कृषि के लिए यह प्रोत्साहन जल प्रसार क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹25,000 तक सीमित है। वहीं, अधिकतम ₹1,00,000 का प्रोत्साहन 4 हेक्टेयर तक के क्षेत्र के लिए उपलब्ध है। एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र वाले फार्मों के लिए प्रोत्साहन आनुपातिक आधार पर दिया जाता है।

केज कल्चर, पुनर्चक्रण मत्स्य पालन प्रणाली (RAS), बायोफ्लॉक, रेसवे और इसी तरह की उन्नत जलीय कृषि प्रणालियों के लिए भी बीमा प्रीमियम का 40 प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाता है। इसके तहत अधिकतम प्रोत्साहन ₹1,00,000 और पात्र इकाई का अधिकतम आकार 1,800 घन मीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी के लिए देय प्रोत्साहन के अतिरिक्त 10 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है।

बीमित जोखिम होने पर लाभार्थी को दावा प्रक्रिया शुरू करने के लिए तत्काल बीमा कंपनी को इसकी सूचना देनी होती है। बीमाधारक को पॉलिसी की शर्तों के अनुसार जरूरी दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं। इसके बाद बीमा कंपनी नुकसान के आकलन के लिए क्षति मूल्यांकनकर्ता नियुक्त करती है। मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर दावे की प्रक्रिया पूरी की जाती है और बीमाधारक को भुगतान किया जाता है। बीमा कंपनी के पोर्टल के माध्यम से दावे की स्थिति की जानकारी भी समय-समय पर उपलब्ध कराई जाती है। पूरी दावा निपटान प्रक्रिया झींगा पालन के लिए 30 दिनों और अन्य जलीय कृषि गतिविधियों के लिए 45 दिनों के भीतर पूरी की जानी है।

वर्तमान में चार बीमा कंपनियां—ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AICL), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (NIAL) और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (UIIC)—झींगा, मीठे पानी की मछलियों और ठंडे पानी की प्रजातियों के लिए बीमा कवरेज उपलब्ध करा रही हैं। बीमा इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए निजी बीमा कंपनियों को भी इससे जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।

योजना के तहत एकमुश्त प्रोत्साहन घटक के क्रियान्वयन में भी प्रगति हुई है। अब तक कुल 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इनमें से 127 आवेदनों को मंजूरी देकर प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। इसके तहत 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को लाभ मिला है और कुल ₹40.03 लाख की राशि वितरित की गई है।

जलीय कृषि बीमा का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब किसानों और बीमा कंपनियों के बीच निष्पक्ष आकलन और समयबद्ध दावा निपटान को लेकर विश्वास कायम हो। इसके लिए दावों के प्रबंधन में लगातार सुधार, सत्यापन के लिए तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और मामलों के समयबद्ध समाधान पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल प्रीमियम पर सब्सिडी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जलीय कृषि बीमा के लिए एक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बाजार तैयार करना है। इसके लिए केंद्र सरकार नीति दिशा और डिजिटल ढांचा उपलब्ध कराएगी, राज्य सरकारें पहुंच और जमीनी स्तर पर सहायता सुनिश्चित करेंगी, बीमा कंपनियां बीमा उत्पादों का विकास और सेवा प्रदान करेंगी, किसान जोखिम सुरक्षा को कृषि प्रबंधन का हिस्सा बनाएंगे और तकनीकी संस्थान जोखिम आकलन, निगरानी तथा नुकसान के सत्यापन को मजबूत करेंगे।

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