भारतीय कृषि में बदलाव लाएगा तकनीक और अनुसंधान, पीएम मोदी ने साझा किया शिवराज सिंह चौहान का आलेख – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 23 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: भारतीय कृषि में बदलाव लाएगा तकनीक और अनुसंधान, पीएम मोदी ने साझा किया शिवराज सिंह चौहान का आलेख – भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और किसानों के लिए लाभकारी बनाने में तकनीक और अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसी विषय पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक आलेख लिखा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया है। इस आलेख में कृषि क्षेत्र में बदलाव, पोषण सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल खेती, संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों को बाजार से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आलेख साझा करते हुए भारतीय कृषि में बदलाव लाने और किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में तकनीक एवं अनुसंधान की भूमिका को रेखांकित किया। आलेख में बताया गया है कि बदलती जरूरतों के अनुसार कृषि क्षेत्र को विकसित करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का कुशल उपयोग और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद कृषि और किसान कल्याण को देश के विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान मिला है। वर्ष 2015 से कृषि क्षेत्र में बदलाव की दिशा में प्रयासों को गति मिली है। अब लक्ष्य ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करना है, जो अधिक उत्पादक होने के साथ टिकाऊ, जलवायु के अनुकूल और तकनीक आधारित हो।

आलेख में बताया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच 2,336 फसल किस्में जारी की गईं, जबकि वर्ष 2003 से 2014 के दौरान यह संख्या 1,540 थी। नई किस्मों के विकास में जलवायु सहनशीलता को भी ध्यान में रखा गया है। इसके साथ ही जैव-सुदृढ़ीकरण (बायोफोर्टिफिकेशन) पर भी अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जिससे पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, एग्रीस्टैक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सलाहकारी प्लेटफॉर्म की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। इनके माध्यम से किसानों तक उनकी जरूरत के अनुरूप जानकारी पहुंचाने और कृषि सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में मदद मिल सकती है।

आलेख के अनुसार, भारत में हरित क्रांति ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि, अब कृषि क्षेत्र को बदलती जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। किसानों की आकांक्षाओं, उपभोक्ताओं की खानपान संबंधी आदतों और बाजार की मांग में बदलाव के कारण कृषि में विविधता लाना जरूरी हो गया है। वर्ष 1972-73 में ग्रामीण भारत में अनाज पर खाद्य व्यय का हिस्सा लगभग 57 प्रतिशत था, जो वर्ष 2022-23 तक घटकर करीब 11 प्रतिशत रह गया। वहीं, दूध, फल, सब्जियां, अंडे, मांस और मछली जैसे उत्पादों पर खर्च का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत से बढ़कर करीब 48 प्रतिशत हो गया।

इन आंकड़ों के आधार पर आलेख में दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य उच्च मूल्य वाली कृषि गतिविधियों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। इसका उद्देश्य किसानों को उन क्षेत्रों से जोड़ना है, जहां उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के माध्यम से भी आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।

कृषि क्षेत्र के सामने पानी, उर्वरक, ऊर्जा और जमीन जैसे संसाधनों के सीमित होने की चुनौती है। इसके अलावा भूजल का कम होना, मिट्टी का क्षरण, जलवायु में बदलाव और चरम मौसमी घटनाएं भी खेती को प्रभावित कर रही हैं। आलेख में कहा गया है कि भविष्य की कृषि व्यवस्था में पानी, पोषक तत्वों और ऊर्जा का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना होगा। इसके लिए जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों, कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों, मिट्टी की सेहत सुधारने, एकीकृत कीट प्रबंधन, संरक्षण कृषि और सटीक खेती जैसी पद्धतियों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

शिवराज सिंह चौहान ने इस संदर्भ में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और पीएम-कुसुम जैसी पहलों का उल्लेख किया है। इनके माध्यम से जल उपयोग की दक्षता, मिट्टी की जांच और कृषि में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

आलेख में कृषि उत्पादन के साथ बाजार तक पहुंच को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। फल-सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों का उत्पादन बढ़ने से उनके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर व्यवस्था की आवश्यकता बढ़ी है। इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और किसान समूहों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। इनके माध्यम से किसान अपनी उपज का सामूहिक विपणन कर सकते हैं, लागत घटा सकते हैं और बाजार में अपनी सौदेबाजी की क्षमता बढ़ा सकते हैं।

आलेख में ई-नाम (e-NAM), कृषि अवसंरचना कोष, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना और सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने वाली योजना का भी उल्लेख है। इन पहलों का उद्देश्य कृषि उपज के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन को मजबूत करना है, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिलें।

शिवराज सिंह चौहान ने आलेख में कहा है कि कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव केवल केंद्र सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, किसान संगठनों, सहकारी समितियों, निजी क्षेत्र और वित्तीय संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। भारत की कृषि जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के लिहाज से विविधतापूर्ण है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट लक्ष्य तय करने के साथ स्थानीय जरूरतों के अनुसार समाधान अपनाना भी जरूरी है।

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