धान की जगह दूसरी फसल उगाने पर मिलेंगे प्रति एकड़ 15000 रुपये, 31 अक्टूबर तक करें आवेदन, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के किसानों के लिए खुशखबरी है. धान की जगह दूसरी फसलें उगाने पर कृषक उन्नति योजना के तहत 15,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी. इसके लिए किसानों को 31 अक्टूबर तक आवेदन करना होगा. योजना का उद्देश्य किसानों को धान के अलावा अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है. सरकार को उम्मीद है कि उसकी इस कोशिश से किसानों की इनकम में बढ़ोतरी होगी. साथ ही जिले में धान के अलावा अन्य फसलों का रकबा भी बढ़ेगा.

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क की रिपोर्ट के मुताबिक, बालोद जिले में किसानों की आय बढ़ाने और धान के अलावा दूसरी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत आवेदन मांगे गए हैं. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर किसानों से इस योजना के लिए पंजीकरण कराने की अपील की गई है. इच्छुक किसान 31 अक्टूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं.

कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ सीजन 2026 में धान की जगह दूसरी फसल उगाने वाले किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि दी जाएगी. वहीं, पहले से दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की खेती करने वाले किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ की मदद मिलेगी. योजना की राशि किसानों के बैंक खाते में सीधे डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी.

कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने के लिए किसान 31 अक्टूबर 2026 तक पंजीकरण करा सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपने क्षेत्र की नजदीकी सेवा सहकारी समिति में जाकर एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख से पहले पंजीकरण कराकर योजना का लाभ उठाएं.

ऐसे छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए धान की सरकारी खरीद 12 नवंबर 2026 से शुरू होगी. यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2027 तक चलेगी. राज्य सरकार ने इस बार 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है. नई व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों को धान बेचने के लिए ज्यादा अवसर देने की कोशिश की गई है. ऐसे में किसानों के लिए धान बेचने से पहले रजिस्ट्रेशन, टोकन लेने और धान में नमी से जुड़े नियमों की जानकारी रखना जरूरी है. वहीं, सरकार ने धान खरीदी केंद्रों पर छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है. इसके तहत हर दिन खरीदे जाने वाले कुल धान का 70 फीसदी हिस्सा इन किसानों के लिए तय किया जाएगा. इससे छोटे और सीमांत किसानों को अपनी उपज बेचने का ज्यादा मौका मिलेगा.

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