एग्रीवेट: UP Mango Export: उत्तर प्रदेश के आम अब सिर्फ देश की मंडियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सात समंदर पार विदेशी बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं. बीते पांच वित्तीय वर्षों में यूपी से 90,844 क्विंटल से ज्यादा आम का निर्यात हुआ है. खाड़ी देशों और नेपाल के अलावा यूरोपीय बाजारों में भी पहुंच बढ़ाने की तैयारी है. सरकार ने बाग से लेकर पैक हाउस और फिर विदेशी बाजार तक पूरी निर्यात श्रृंखला को मजबूत किया है. इसका फायदा आम उत्पादकों को बड़े बाजार और बेहतर मांग के रूप में मिलने की उम्मीद है.
विदेशी बाजार में यूपी की कई आम किस्मों की मांग है, लेकिन चौसा सबसे आगे है. राज्य से निर्यात होने वाले आम में चौसा की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत बताई गई है. इसकी बेहतर टिकाऊपन और अपेक्षाकृत लंबी शेल्फ लाइफ लंबी दूरी के बाजारों के लिए इसे अनुकूल बनाती है. वहीं दशहरी की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत और रटौल की करीब 15 प्रतिशत है. मलीहाबाद का दशहरी अपनी मिठास और खुशबू, जबकि बागपत का रटौल अपने खास स्वाद-सुगंध के लिए जाना जाता है. बनारसी लंगड़ा, आम्रपाली और पूर्वांचल का गवरजीत भी विदेशी बाजार से जोड़ने की तैयारी में हैं.
इस साल करीब 650 आम उत्पादक फार्मों का हॉर्टीनेट पर पंजीकरण कराया गया है. यह एपीडा की ट्रेसबिलिटी प्रणाली है, जिसके जरिए आम को उत्पादक फार्म से पैक हाउस और फिर निर्यात तक ट्रैक किया जा सकता है. इससे गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात मानकों को पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही मंडी परिषद ने पहली बार किसानों को 15 लाख मैंगो कवर उपलब्ध कराए हैं, जिससे फलों को कीट, दाग-धब्बों और मौसम के असर से बचाने में मदद मिलेगी.
डीजीसीआईएस के आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 से 2025-26 के बीच यूपी से 9,084.41 मीट्रिक टन यानी 90,844 क्विंटल से ज्यादा आम का निर्यात हुआ. यूएई, सऊदी अरब, कतर और नेपाल प्रमुख बाजारों में शामिल हैं. इस साल अमरोहा से 12.5 मीट्रिक टन दशहरी और लंगड़ा की खेप रीफर कंटेनर के जरिए समुद्री मार्ग से दुबई भेजी गई. वहीं, उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 के तहत निर्यातकों को परिवहन लागत और मार्केटिंग से जुड़ी गतिविधियों में भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है.