एग्रीवेट: Paraquat Dichloride Ban India: भारत सरकार ने बेहद जहरीले खरपतवारनाशक पैराक्वाट डाइक्लोराइड के इस्तेमाल को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने इस रसायन के नए रजिस्ट्रेशन पर तुरंत रोक लगा दी है. साथ ही, पहले से जारी इसके सभी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी रद्द करने का फैसला किया गया है. इस फैसले के बाद भारत उन करीब 70 देशों में शामिल हो गया है, जहां पैराक्वाट डाइक्लोराइड के इस्तेमाल पर रोक या कड़े नियम लागू हैं.
सरकार ने यह फैसला कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत लिया है. केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की सलाह और रजिस्ट्रेशन कमेटी से चर्चा के बाद पैराक्वाट डाइक्लोराइड के नए रजिस्ट्रेशन पर तुरंत रोक लगाने का फैसला किया. इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. इससे पहले 10 जुलाई 2026 को सरकार ने इस फैसले का मसौदा जारी किया था और लोगों से सुझाव व आपत्तियां मांगी थीं. 30 दिन तक सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सरकार ने इस रसायन पर रोक लगाने का अंतिम फैसला लिया है.
सरकार ने पहले से जारी पैराक्वाट डाइक्लोराइड के सभी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी रद्द करने का फैसला किया है. अगर किसी कंपनी या सर्टिफिकेट धारक ने अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट वापस नहीं किया, तो उसके खिलाफ कीटनाशक कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. राज्य सरकारों को भी इस फैसले को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.
पैराक्वाट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल खेतों में खरपतवार यानी अनचाही घास-पौधों को खत्म करने के लिए किया जाता है. लेकिन यह इंसानों और जानवरों के लिए बेहद जहरीला माना जाता है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी थोड़ी मात्रा भी अगर गलती से शरीर में चली जाए तो जानलेवा हो सकती है. पैराक्वाट के जहर का कोई तय इलाज या एंटीडोट भी उपलब्ध नहीं है. इसके संपर्क या सेवन का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों और किडनी पर पड़ सकता है. जहर शरीर में जाने के बाद फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. कई मामलों में फेफड़ों में ऐसी स्थिति बन सकती है, जिससे सांस लेने में लगातार परेशानी होती है. यही वजह है कि, लंबे समय से इसके सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर बैन का फैसला अचानक नहीं आया है. वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, शिक्षाविदों और पर्यावरण से जुड़े लोगों की ओर से लंबे समय से इस खरपतवारनाशक को बैन करने की मांग की जा रही थी. इन लोगों ने केंद्रीय कृषि मंत्री से पैराक्वाट के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर असर को देखते हुए इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की थी. सरकार के ताजा फैसले के बाद अब इसके रजिस्ट्रेशन और इस्तेमाल से जुड़ी पुरानी व्यवस्था खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होगी.
भारत में जहरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली घटनाएं पहले भी चिंता का कारण रही हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में देश में कीटनाशक से जुड़ी 34,000 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं. इनमें 26,921 मौतें कीटनाशक खाने से हुई आत्महत्याओं से जुड़ी थीं, जबकि 7,821 मामले आकस्मिक जहर खाने के थे. इन आंकड़ों के बीच पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर रोक को इंसानों और जानवरों की सुरक्षा से जुड़े बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. अब राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होगी कि वे केंद्र के आदेश को जमीन पर लागू कराएं और इसके इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करें.