एग्रीवेट: महाराष्ट्र में भयंकर सूखे से जूझ रहे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है, जो उन्हें आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर रहा है. लातूर के बोरगांव में किसान ने सोयाबीन फसल बर्बाद होने और सरकारी राहत नहीं मिलने से दुखी होकर जान दे दी. किसान ने आत्महत्या से पहले वीडियो में अपनी पीड़ा बयान की और फिर आत्मघाती कदम उठा लिया. बता दें कि महाराष्ट्र में 3 सप्ताह में 3 किसान फसल बर्बाद होने से उपज वित्तीय दिक्कतों के चलते आत्महत्या कर चुके हैं.
महाराष्ट्र के लातूर जिले में फसल बर्बाद होने और बेटी के मेडिकल कॉलेज की बकाया फीस नहीं भर पाने से परेशान 46 वर्षीय किसान शंकर अबनराव क्षीरसागर ने अधिकारियों से मदद की अपील करते हुए वीडियो पोस्ट करने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया कि सोमवार को बोरगांव गांव स्थित अपने खेत में आत्महत्या करने से पहले शंकर अबनराव क्षीरसागर ने वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि सूखे के कारण सोयाबीन की फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें सरकार से राहत क्यों नहीं मिली.
पुलिस के अनुसार किसान क्षीरसागर ने अच्छी फसल की उम्मीद में अपनी थोड़ी-सी जमीन पर सोयाबीन की खेती की थी. हालांकि, लंबे समय तक बारिश नहीं होने के कारण कथित तौर पर उनकी फसल खराब हो गई. उनकी एक बेटी मेडिकल की पढ़ाई कर रही है, लेकिन आवेदन करने के बावजूद कथित तौर पर उसकी फीस माफ नहीं की गई थी. यह स्थिति तब थी, जब सरकार ने सूखे से प्रभावित किसानों के बच्चों को फीस में छूट देने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि थी.
रिपोर्ट के अनुसार लिंबगांव पुलिस थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक बोधनकर ने बताया कि फसल बर्बाद होने, बकाया कर्ज और बेटी की पढ़ाई के खर्च से पैदा हुए आर्थिक बोझ के कारण वह कथित तौर पर परेशान थे. उन्होंने बताया कि क्षीरसागर सोमवार दोपहर अपने खेत गए, वहां अपने मोबाइल फोन पर एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. वीडियो की जानकारी मिलने के बाद उनके रिश्तेदारों और पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की.
अधिकारी ने बताया कि पुलिस के मौके पर पहुंची तो क्षीरसागर खेत में फंदे से लटके हुए मिले. वीडियो में क्षीरसागर ने जिला कलेक्टर से भावुक अपील करते हुए सवाल किया कि उन्हें कर्ज माफी की किसी योजना का लाभ क्यों नहीं मिला और आवेदन करने के बावजूद उनकी बेटी की मेडिकल कॉलेज की फीस माफ क्यों नहीं की गई. घटना के बाद राजस्व और कृषि विभाग की टीमों ने पीड़ित के गांव पहुंचीं और मामले की जानकारी लेकर प्रशासन से हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिया है.