एग्रीवेट: 21 सितंबर 2026, गुवाहाटी: असम में धान की सैली फसल पर झुंडकारी सूंडी का हमला, फिप्रोनिल छिड़काव की सलाह – असम में खरीफ सीजन की सैली धान फसल पर झुंडकारी सूंडी (स्वार्मिंग कैटरपिलर) कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की कृषि मौसम इकाई (AMFU) ने 18 सितंबर को जारी सलाह में किसानों को समय रहते कीटनाशक छिड़काव की सलाह दी है।
बुलेटिन के मुताबिक झुंडकारी सूंडी के नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 5% एससी दवा का 1.5 से 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। यह कीट पत्तियों को समूह में खाता है और तेजी से पूरे खेत में फैल सकता है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही छिड़काव करना जरूरी बताया गया है। खेत की सीमा और पानी भरे हिस्सों के आसपास खासतौर पर निगरानी रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह कीट अक्सर वहीं से फसल में फैलना शुरू करता है।
उसी बुलेटिन में सैली धान में म्यान झुलसा (शीथ ब्लाइट) रोग के लिए प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी दवा का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव सुझाया गया है। यह रोग पौधे के निचले हिस्से से शुरू होकर ऊपर की ओर फैलता है, इसलिए समय पर पहचान जरूरी है।
इसके अलावा सब्जियों की नर्सरी में होने वाले डैंपिंग-ऑफ रोग से बचाव के लिए एजॉक्सिस्ट्रोबिन दवा का 0.4 ग्राम प्रति लीटर या ट्राइफ्लोक्सिस्ट्रोबिन का 0.6 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। बुलेटिन में किसानों से यह भी कहा गया है कि छिड़काव के दौरान दस्ताने और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरण जरूर पहनें।
कृषि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि असम में इस समय लगातार नमी और हल्की बारिश का मौसम बना हुआ है, जो कीट-पतंगों के पनपने के लिए अनुकूल है। इसलिए बुलेटिन में किसानों को सलाह दी गई है कि वे हफ्ते में कम से कम दो बार खेत का निरीक्षण करें और पत्तियों पर कीट के अंडे या छोटी सूंडियां दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें, ताकि कीट बड़े होकर ज्यादा नुकसान पहुंचाने से पहले ही नियंत्रित हो जाएं। किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले पैकेट पर दी गई मात्रा और सावधानियों को ध्यान से पढ़ने की सलाह भी दी गई है।
बुलेटिन में बताया गया है कि सैली धान अभी बालियां बनने की अवस्था में है, जो कीट-रोग के हमले के लिहाज से सबसे संवेदनशील समय माना जाता है। इसलिए विशेषज्ञों ने किसानों से कहा है कि इस दौरान खेत में पानी का स्तर सामान्य बनाए रखें, क्योंकि ज्यादा पानी भरा रहने से झुंडकारी सूंडी जैसे कीटों को पनपने में मदद मिलती है। साथ ही यह भी सलाह दी गई है कि छिड़काव के लिए इस्तेमाल होने वाले यंत्र और टंकी को हर बार साफ करके ही इस्तेमाल करें, ताकि दवा में मिलावट या असर कम होने की आशंका न रहे।
कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित इलाकों के खेतों का दौरा कर किसानों को सही समय पर सलाह दें। असम में इस समय कई जिलों में सैली धान की बुवाई एक साथ हुई है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती चरण में ही कीट पर काबू पा लिया जाए, तो आसपास के खेतों में इसके फैलने का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाएगा।