एग्रीवेट: 01 अक्टूबर2026, भोपाल: मछली पालन में बढ़ते जोखिमों के बीच बीमा बनेगा आर्थिक सुरक्षा का सहारा – मछली पालन और जलीय कृषि में निवेश बढ़ने के साथ बीमारी और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का प्रभाव भी किसानों की आय पर पड़ सकता है। ऐसे में बीमा को जोखिम प्रबंधन के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जा रहा है। बीमा प्रोत्साहन मिलने से पात्र किसानों के लिए पॉलिसी लेना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है और नुकसान की स्थिति में आर्थिक जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है।
भारत में पिछले एक दशक में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में देश का कुल मछली उत्पादन 9.6 मिलियन टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 19.8 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस वृद्धि के साथ भारत वैश्विक मत्स्य उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला देश बन गया है और वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है।
मत्स्य पालन अब केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित नहीं रह गया है। जलीय कृषि के माध्यम से बड़ी संख्या में किसान रोजगार और आय के अवसर प्राप्त कर रहे हैं। तालाब आधारित मत्स्य पालन से लेकर विभिन्न प्रकार की आधुनिक जलीय कृषि गतिविधियों तक इसका दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता भी पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।बीमा से कम होगा आर्थिक जोखिम
जलीय कृषि में किसी बीमारी का फैलाव, अचानक बाढ़, चक्रवात अथवा जल की गुणवत्ता में बदलाव पूरे उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए इस तरह का नुकसान दोबारा उत्पादन शुरू करने में बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है। ऐसे में बीमा और उसके लिए मिलने वाला सरकारी प्रोत्साहन किसानों को जोखिम के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने में सहायक हो सकता है।
योजना के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का डीबीटी के जरिए हस्तांतरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक कदम है। जरूरत इस बात की है कि पात्र जलीय कृषि किसानों तक योजना की जानकारी समय पर पहुंचे और वे बीमा की शर्तों, पात्रता तथा दावा प्रक्रिया को समझकर इसका लाभ उठाएं। इससे तेजी से बढ़ते मत्स्य क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। देश में मछली पालन और जलीय कृषि का क्षेत्र लगातार विस्तार ले रहा है। उत्पादन बढ़ने के साथ इस क्षेत्र से जुड़े किसानों और उद्यमियों के सामने प्राकृतिक आपदाओं, रोगों तथा जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान का जोखिम भी बढ़ रहा है। बाढ़, चक्रवात, जल प्रदूषण और मौसम में बदलाव के कारण जलीय कृषि को होने वाले नुकसान से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जलीय कृषि बीमा को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत पात्र जलीय कृषि किसानों को एक फसल चक्र के लिए बीमा पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम लागत का अधिकतम 40 प्रतिशत प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। यह प्रोत्साहन राशि राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी। योजना का उद्देश्य जलीय कृषि से जुड़े किसानों को जोखिम की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ बीमा के प्रति जागरूक करना है।