एग्रीवेट: 22 सितंबर 2026, भोपाल: भारी बारिश भी नहीं बिगाड़ सकी सोयाबीन की फसल, किसान ने मेड़-नाली पद्धति से बदली खेती – मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के फतेहपुर निवासी किसान सोबरन सिंह धाकड़ ने पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर सोयाबीन की फसल को जलभराव से बचाने का तरीका अपनाया। पहले सामान्य बोवनी पद्धति और अनिश्चित मानसूनी बारिश के कारण खेत में अत्यधिक पानी भरने से सोयाबीन की फसल को नुकसान होने की चिंता रहती थी। ऐसे में उन्होंने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में रिज एंड फरो यानी मेड़ एवं नाली पद्धति से सोयाबीन की बोवनी की।
कृषि विभाग के आत्मा कार्यक्रम के ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक रघुवीर सिंह यादव और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सोबरन सिंह ने उन्नत कृषि पद्धतियों और किस्मों की जानकारी ली। विभाग के परामर्श के बाद उन्होंने अपने एक बीघा खेत में सोयाबीन की खेती करने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया और रिज एंड फरो पद्धति को अपनाया। तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार उन्होंने 12 से 15 किलोग्राम प्रति बीघा की दर से बीज का उपयोग किया। वहीं कतार से कतार की दूरी 1.5 फीट यानी 18 इंच रखी गई।
रिज एंड फरो पद्धति का असर भारी बारिश के दौरान देखने को मिला। अत्यधिक बारिश के बावजूद नालियों के माध्यम से अतिरिक्त पानी खेत से बाहर निकल गया और जलभराव नहीं हुआ। इससे सोयाबीन की फसल सुरक्षित रही। पौधे स्वस्थ रहे, शाखाओं का बेहतर विकास हुआ और मजबूत दाने बनने से उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हुई। इस तकनीक ने सीमित संसाधनों के बीच फसल को सुरक्षित रखने में सोबरन सिंह की मदद की।
सोबरन सिंह धाकड़ द्वारा एक बीघा भूमि में अपनाई गई रिज एंड फरो पद्धति की सफलता आसपास के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। जलभराव से फसल को बचाने और कम लागत में बेहतर पैदावार लेने का उनका तरीका किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सोबरन सिंह के खेत का अवलोकन कर उनके द्वारा अपनाई गई उन्नत तकनीक और समर्पण की सराहना की। किसान सोबरन सिंह ने कृषि विभाग और जिला प्रशासन की ओर से मिले समयोचित मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।