एग्रीवेट: रासायनिक खाद के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत खराब होने की चिंता बढ़ रही है. इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) जारी करना शुरू किया है. खास बात यह है कि प्रयागराज जिले में अब तक किसानों को कुल 77,800 सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं. इस कार्ड के जरिए किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करा सकते हैं और उसमें पोषक तत्वों की स्थिति जान सकते हैं. इससे फसल के लिए जरूरी खाद का सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी.
प्रयागराज की क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक पीयूष राय ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को कहा कि चालू वित्त वर्ष में जिले में खरीफ सीजन के लिए 8,800 सॉयल हेल्थ कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया था. विभाग ने अक्टूबर में ही यह लक्ष्य पूरा कर लिया है. इससे पहले 2025 में 46,000 और 2024 में 23,000 कार्ड बनाए गए थे. इस तरह प्रयागराज जिले में अब तक किसानों को कुल 77,800 सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं.
प्रयागराज में मुख्य प्रयोगशाला के अलावा जिले की पांचों तहसीलों में अलग-अलग मिट्टी जांच केंद्र खोले गए हैं. इन केंद्रों पर मिट्टी के छह मानकों की जांच की जाती है. बाकी छह मानकों की जांच जिला मुख्यालय स्थित मृदा संरक्षण प्रयोगशाला में होती है. इस तरह सॉयल हेल्थ कार्ड तैयार करने के लिए मिट्टी के कुल 12 मानकों का आकलन किया जाता है. दरअसल, अधिक पैदावार हासिल करने की कोशिश में कई किसान खेतों में जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. सॉयल हेल्थ कार्ड के जरिए किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद के इस्तेमाल के बारे में जानकारी देने में मदद मिलेगी.
अधिक पैदावार हासिल करने के लिए खेतों में यूरिया और दूसरे रासायनिक खादों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे मिट्टी में मौजूद फायदेमंद कीड़े और बैक्टीरिया कम हो रहे हैं. प्रयागराज जिले में मिट्टी में जैविक कार्बन का औसत स्तर भी सामान्य मध्यम स्तर से नीचे है. इससे मिट्टी की गुणवत्ता और फसल उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है.
मिट्टी में जैविक कार्बन उसकी सेहत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. यह मिट्टी के कणों को जोड़कर रखता है, जिससे मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और उसमें हवा और पानी का आवागमन आसानी से होता है. जैविक कार्बन की कमी से मिट्टी सख्त हो जाती है और उसकी ऊपरी सतह पर पपड़ी जमने लगती है. इससे पानी और हवा का मिट्टी के अंदर पहुंचना मुश्किल हो जाता है.
मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कृषि विभाग किसानों को जरूरी उपायों की जानकारी दे रहा है. इसके साथ ही, बदलते मौसम के अनुसार खेती करने के बेहतर तरीके भी बताए जा रहे हैं, ताकि किसान मौसम में होने वाले बदलावों के बीच फसलों की पैदावार बनाए रख सकें. कृषि विभाग किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने के लिए जागरूक कर रहा है. इसके बजाय उन्हें ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक उत्पादों और हरी खाद के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के लिए तैयार करना है, ताकि वे पशुओं से मिलने वाले उत्पादों से तैयार खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल कर सकें. उप कृषि निदेशक पवन कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए किसानों को पानी बचाने की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. इसमें ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ यानी हर बूंद से ज्यादा फसल लेने की तकनीक शामिल है.