एग्रीवेट: भारत के इथेनॉल और अल्कोहल उद्योग के संगठन ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने इथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए सरकार की नीति का स्वागत किया है. संगठन ने कहा कि सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने इथेनॉल खरीद से जुड़ी निविदा में संतुलित रुख अपनाया है. इसमें कच्चे माल की उपलब्धता, कृषि की जरूरतों और देश में इथेनॉल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखा गया है. AIDA के मुताबिक, इस समय कृषि उत्पादन पर मौसम के बदलते हालात और अल नीनो के संभावित असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में अनाज और दूसरे कच्चे माल की उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा, किसानों के हित और देश की ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. संगठन का मानना है कि सरकार की नीतियों से इन सभी प्राथमिकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए.
संगठन ने कहा कि भारत पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए इथेनॉल उत्पादकों को उचित प्रोत्साहन, कच्चे माल के हिसाब से लाभकारी खरीद मूल्य और उत्पादन में जरूरी लचीलापन देना होगा. AIDA के अनुसार, इथेनॉल बनाने के लिए कच्चे माल के अलग-अलग विकल्प होना जरूरी है. इससे कृषि उत्पादन, बाजार भाव और अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धता में बदलाव होने पर भी उत्पादन जारी रखने में मदद मिलेगी. संगठन ने कहा कि हर तरह के कच्चे माल की लागत और उत्पादन प्रक्रिया अलग होती है. इसलिए सरकार को खरीद मूल्य और प्रोत्साहन तय करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए. साथ ही, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे इथेनॉल उत्पादन के लिए किसी एक ही कच्चे माल पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता न बढ़े.
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने कहा है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए किसी एक कच्चे माल को दूसरों के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए. संगठन के मुताबिक, मक्का समेत इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाले सभी कच्चे माल को उचित सरकारी प्रोत्साहन और लाभकारी कीमत मिलनी चाहिए. इससे इथेनॉल उद्योग को मजबूत बनाने, किसानों को बाजार उपलब्ध कराने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी. AIDA ने कहा कि संतुलित नीति से इथेनॉल उद्योग में निवेश सुरक्षित रहेगा. साथ ही, कृषि से जुड़े कारोबार और किसानों की आय को भी समर्थन मिलेगा. संगठन ने इस संबंध में सरकार के साथ बातचीत करने की इच्छा जताई है.
AIDA के मुताबिक, मक्का से इथेनॉल बनाने में कच्चा माल खरीदने, प्रसंस्करण और उत्पादन संचालन पर काफी खर्च होता है. ऐसे में इस क्षेत्र को उचित सरकारी प्रोत्साहन देना जरूरी है. इससे अनाज आधारित इथेनॉल संयंत्रों में निवेश बना रहेगा और घरेलू कृषि आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी. संगठन का मानना है कि इससे मक्का किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थिर बाजार भी मिल सकेगा.
AIDA ने गन्ने से इथेनॉल उत्पादन के मामले में चीनी की उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा, किसानों के हितों और चीनी उद्योग के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया है. एसोसिएशन के अनुसार, कच्चे माल के इस्तेमाल से जुड़े फैसले कृषि परिस्थितियों, क्षेत्रीय उपलब्धता और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए. AIDA ने सरकार की मौजूदा नीति और निर्धारित सुरक्षा उपायों के दायरे में चीनी मिलों और डिस्टिलरी इकाइयों को गन्ने के रस, शुगर सिरप और बी-हैवी मोलासेस के इस्तेमाल में उचित व्यावसायिक लचीलापन देने की मांग की है. यह सुविधा वहां मिलनी चाहिए, जहां ये कच्चे माल उपलब्ध हों और उनका इस्तेमाल आर्थिक रूप से व्यावहारिक हो. हालांकि, यह देश की चीनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए. एसोसिएशन का कहना है कि इससे चीनी मिलें और डिस्टिलरी इकाइयां अपनी मौजूदा क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगी और बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार उत्पादन की योजना बना सकेंगी. साथ ही, इससे अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन को भी सहयोग मिलेगा. किसी एक कच्चे माल पर अत्यधिक निर्भरता घटने से कृषि और उद्योग से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत बन सकती है.