एग्रीवेट: Rabi Conference 2026: दिल्ली के पूसा में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें रबी सीजन की तैयारियों और खेती से जुड़ी कई अहम चुनौतियों पर चर्चा हुई. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि, देश की खेती लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन बदलता मौसम और कई राज्यों में सूखे की स्थिति नई चुनौतियां खड़ी कर रही है. उन्होंने भरोसा दिया कि जहां फसलें सूखे और पानी की कमी से प्रभावित हो रही हैं, वहां केंद्र सरकार राज्यों के साथ खड़ी है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस समय देश के कई हिस्सों में मौसम का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है. महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे का संकट बना हुआ है. उन्होंने बताया कि कर्नाटक ने सूखा घोषित किया है, जबकि महाराष्ट्र में भी राज्य के करीब दो-तिहाई हिस्से में सूखे की स्थिति घोषित की गई है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि हर जगह फसल खराब नहीं हुई है. कई इलाकों में फसल अच्छी स्थिति में है, लेकिन जहां पानी की कमी और सूखे का असर है, वहां किसानों को मदद की जरूरत है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है.
कृषि मंत्री ने बदलते मौसम को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि, मौसम का पैटर्न पहले जैसा नहीं रहा. जिस समय कुछ इलाकों में सामान्य तौर पर गर्मी होती थी, उस समय कई जगह ठंड जैसा मौसम महसूस हो रहा है. उन्होंने उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार तेज बारिश के कारण कई लोगों की मौत की खबर सामने आई. दूसरी तरफ महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में सूखे की स्थिति बनी हुई है. इससे पता चलता है कि जलवायु बदलाव का असर खेती और आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, इस साल अल नीनो के असर को लेकर पहले से चिंता थी. इसके बावजूद देश में खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया. हालांकि, कई जगह मौसम की वजह से फसलों पर असर पड़ा है और कुछ क्षेत्रों में फसल खराब होने का खतरा भी बना हुआ है. उन्होंने राज्यों से कहा कि जहां खरीफ फसलों को नुकसान का खतरा है, वहां स्थिति का आकलन कर किसानों की जरूरतों के हिसाब से आगे की तैयारी की जाए.
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में अब रबी सीजन की तैयारियों पर खास ध्यान दिया जा रहा है. शिवराज ने कहा कि कृषि सम्मेलन को सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं बनाया गया है. इसमें राज्यों की भागीदारी बढ़ाई गई है और अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर भी कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है. रबी की तैयारी में बीज, खाद, फसल योजना और किसानों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर राज्यों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया जा रहा है. मकसद यह है कि किसानों को सीजन शुरू होने से पहले जरूरी सुविधाएं मिल सकें.
शिवराज ने कृषि क्षेत्र की प्रगति का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2015 से 2025 के बीच कृषि उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है. उनके मुताबिक, इस दौरान कृषि विकास दर में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि देश ने खेती के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, लेकिन अभी और काम करने की जरूरत है.
कृषि मंत्री ने सम्मेलन में राज्यों से आए प्रतिनिधियों की भागीदारी की सराहना की. उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़ी समस्याओं का समाधान तभी बेहतर तरीके से हो सकता है, जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करें. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें प्रधानमंत्री ने अपने तीसरे कार्यकाल में तीन गुना तेजी से काम करने की बात कही थी. शिवराज ने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री इतनी तेजी से काम करने का लक्ष्य रखते हैं, तो सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि देश के लिए काम करने का मतलब है अपनी जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से निभाना.