एग्रीवेट: बीते गुरुवार और शुक्रवार हुई बारिश से उत्तर प्रदेश में फसलों को नुकसान पहुंचा है. इससे वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र और भदोही समेत कई जिलों में किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेतों में खड़ी धान की फसल भीगने से दानों में अंकुर निकलने का खतरा है. वहीं, खेतों में पानी भरने से आलू, मटर और चने की बुवाई प्रभावित हो सकती है. बारिश के कारण धान की कटाई और रबी फसलों की बुवाई में भी देरी की आशंका है. मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को वाराणसी और आसपास के इलाकों में करीब 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है.
बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के कृषि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर निखिल कुमार सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा है कि यह बारिश कटाई के लिए तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. बारिश से धान के दाने गीले हो जाएंगे और उनकी गुणवत्ता कमजोर हो सकती है. हालांकि, उन्होंने कहा कि खेतों में बढ़ी नमी अगली फसलों की बुवाई के लिए फायदेमंद हो सकती है. किसान जल्द ही गेहूं, मटर और सरसों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं.
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गाजीपुर के सिधौना गांव के किसान उपेंद्र नाथ मिश्रा ने खेतों में खड़ी धान की फसल के साथ चना, मटर, आलू और दूसरी सब्जियों को नुकसान होने की आशंका जताई है. उन्होंने बताया कि कई किसान पहले ही आलू, मटर और चने की बुवाई कर चुके हैं. ऐसे में खेतों में पानी भरने से बीज खराब हो सकते हैं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
वाराणसी के राजापुर कटेहर गांव के किसान सागर यादव ने कहा कि खेतों में खड़ी धान की फसल बारिश से भीग रही है. इससे धान के दानों में समय से पहले अंकुर निकलने का खतरा है. वहीं, गाजीपुर के टेटरपुर गांव के किसान संजय यादव ने कहा कि बारिश के कारण धान की कटाई में देरी हो सकती है. साथ ही, रबी फसलों की बुवाई भी प्रभावित होने की आशंका है.
सब्जियों की सप्लाई पर बात करते हुए सब्जी मंडी के अशोक मौर्य ने कहा कि अगर एक-दो दिन में बारिश रुक जाती है तो मंडी में सब्जियों की आवक पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन बारिश जारी रहने पर सप्लाई प्रभावित हो सकती है. उनके मुताबिक, मंडी में रोजाना करीब 30 ट्रक आलू, 25 ट्रक प्याज और 10 से 20 छोटे ट्रकों में फूलगोभी, पत्तागोभी और बीन्स जैसी सब्जियां आती हैं. कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वे मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं. बारिश रुकने के बाद फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए व्यापक सर्वे कराया जाएगा.